हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मनीष लखानी) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पाँच दिवसीय नारी जागरण शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में झारखण्ड प्रांत के हजारीबाग, कोडरमा, राँची, साहेबगंज, गिरिडीह, गुमला, गोड्डा सहित बीस जिलों की बहिनों ने प्रतिभाग किया, विदाई सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज महिला मण्डल की प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा ने कहा कि नारी जागरण से ही समाज विकास संभव है। अपने व्यक्तित्व विकास के लिए श्रेष्ठ साहित्यों का अध्ययन, आत्मिक विकास हेतु नियमित रूप से गायत्री जप करें। श्रीमती शर्मा ने कहा कि नारियों को इन दिनों नैतिक, बौद्धिक, सामाजिक क्रान्ति की तैयारी करनी है। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज की संरचना की भी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति, परिवार और समाज के तीनों ही क्षेत्रों में सत्प्रवृत्ति संवर्धन और कुरीति उन्मूलन की बहुमुखी प्रवृत्तियों को जन्म देना और मार्गदर्शन करना है।
शिविर समन्वयक ने बताया कि पांच दिन तक चले इस शिविर में कुल २४ सत्र हुए। शिविर का संचालन, संगीत से लेकर सभी कार्य शांतिकुंज की बहिनों ने ही बखूबी निभाया। बाल संस्कारशाला का उद्देश्य एवं स्वरूप, सर्वसुलभ गायत्री उपासना, बच्चों के शासक नहीं-सहायक बनें, गर्भोत्सव एक आंदोलन, व्यक्तित्व विकास के सूत्र, स्वावलंबन एवं उसका व्यावहारिक स्वरूप, संस्कार परंपरा आदि विषयों पर डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ.सुलोचना शर्मा, सुधा महाजन, मणि दास, अर्पणा पंवार, प्रेरणा वाजपेयी, सुशीला अनघोरे, नीलम मोटलानी, ज्योत्सना मोदी, पूर्णिमा अग्रवाल आदि विषय विशेषज्ञ बहिनों ने मार्गदर्शन किया।
(मनीष लखानी) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पाँच दिवसीय नारी जागरण शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में झारखण्ड प्रांत के हजारीबाग, कोडरमा, राँची, साहेबगंज, गिरिडीह, गुमला, गोड्डा सहित बीस जिलों की बहिनों ने प्रतिभाग किया, विदाई सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज महिला मण्डल की प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा ने कहा कि नारी जागरण से ही समाज विकास संभव है। अपने व्यक्तित्व विकास के लिए श्रेष्ठ साहित्यों का अध्ययन, आत्मिक विकास हेतु नियमित रूप से गायत्री जप करें। श्रीमती शर्मा ने कहा कि नारियों को इन दिनों नैतिक, बौद्धिक, सामाजिक क्रान्ति की तैयारी करनी है। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज की संरचना की भी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति, परिवार और समाज के तीनों ही क्षेत्रों में सत्प्रवृत्ति संवर्धन और कुरीति उन्मूलन की बहुमुखी प्रवृत्तियों को जन्म देना और मार्गदर्शन करना है।
शिविर समन्वयक ने बताया कि पांच दिन तक चले इस शिविर में कुल २४ सत्र हुए। शिविर का संचालन, संगीत से लेकर सभी कार्य शांतिकुंज की बहिनों ने ही बखूबी निभाया। बाल संस्कारशाला का उद्देश्य एवं स्वरूप, सर्वसुलभ गायत्री उपासना, बच्चों के शासक नहीं-सहायक बनें, गर्भोत्सव एक आंदोलन, व्यक्तित्व विकास के सूत्र, स्वावलंबन एवं उसका व्यावहारिक स्वरूप, संस्कार परंपरा आदि विषयों पर डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ.सुलोचना शर्मा, सुधा महाजन, मणि दास, अर्पणा पंवार, प्रेरणा वाजपेयी, सुशीला अनघोरे, नीलम मोटलानी, ज्योत्सना मोदी, पूर्णिमा अग्रवाल आदि विषय विशेषज्ञ बहिनों ने मार्गदर्शन किया।



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