हरिद्वार की गूंज (24*7)



(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। निर्वाचन आयोग द्वारा जिन कर्मचारियों की डयूटी मतदाता सूची बनाने मे लगाई जाती है, या तो उन कर्मचारियों की हिन्दी लिखना सही नही है, या ये कहे की लापरवाही उनमे कूट कूट कर भरी है, कितने समय पहले ही हरिद्वार निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार कर ली गयी थी, इन कर्मचारियों की लापरवाही मतदान के दिन मतदाताओं को झेलने पडती है, अब देख लीजिए हरिद्वार नगर निकाय चुनाव मे निर्वाचक नामावली-2018 मे  नगर को नागर लिख रखा है, इसी प्रकार से वार्ड नम्बर 40 की नगर निकाय की नामावली को देखने पर पूरी नामावली मे ज्यादातर एक समुदाय के नामो को लिखने मे लापरवाही कर रखी है, वार्ड नं०-40 के पेज नम्बर-01 को ही ले लो, लिखना था मुस्ताक लिख दिया मुरताक, सत्तार का सचार मेहरूनिशा का मेहरून्निशि पेज नं०-02 मुस्तफा का मुस्मफा, मुनीजा का मुनीगा,पेज नं०-03 सलीम का सलील, मुन्तजिर का मन्तजिर, अरबाज का अरजबाज अब इन शुरू के पेज से अंदाजा लगा सकते है, कि पूरे नगर निकाय क्षेत्र की मतदाता सूची मे कितनी गडबडियां होगी, इन कर्मचारियों की गलती का खामियाजा मतदाताओं को मतदान के दिन भुगतना पडता है, इससे ये साबित होता है, या तो इन कर्मचारियों की देवनागरी लिपि जो राष्ट्र भाषा है, दुरुस्त नही या इनके अन्दर लापरवाही कूट कूट कर भरी हुई है, यदि इनको इनकी इन गलितियो के बारे मे पूछते है, तो कहते कम्प्यूटर त्रुटि है, अरे भाई कम्प्यूटर खुद थोडा ही टाईप कर रहा है, इससे बैठकर भी तो आप लोग ही चला रहे है, गलती किसी से भी हो जाती है, लेकिन इतनी गलतियां होना स्वाभाविक बात नही है, कही ना कही कमी आप मे ही है, या तो लापरवाही से काम करते है, या आपकी राष्ट्र भाषा सही नही है, या आप लोग मतदाता सूची मे किसी कारण से एक समुदाय के नामो को लिखने मे गडबडी करते हो, यदि कोई आदमी किसी समस्या के हल के लिए कोई प्रार्थना पत्र किसी सरकारी कार्यालय मे देता है, तो उसमे कोई त्रुटि हो जाती है, तो सरकारी कर्मचारी ये कहते है, आपने प्रार्थना पत्र मे गलत लिख दिया, जब सरकारी कर्मचारी आम आदमी के प्रार्थना पत्र को गलत बताकर सरकारी कर्मचारी कार्यवाही नही करते तो सरकारी कर्मचारियों की गलतियों को कैसे बर्दास्त किया जा सकता है, ये सभी गलतियां मतदाता सूची का अध्धयन करने से सामने आयी है।
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