हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। स्वच्छ भारत अभियान जैसे नारे सुन सुनकर और इससे सम्बंधित पोस्टर, होर्डिंग्स देखकर आपको भी शायद लगता होगा कि अब साफ सफाई के प्रति तेजी आयेगी, मगर ऐसा नही है। दूर जाने के जरूरत नही है हरिद्वार शहर का दिल रानीपुर मोड़ "शंकराचार्य चौक" पर नगर निगम या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्थाई या अस्थाई शौचालय का प्रबंध नही हो सका है। जबकि इस जगह दिन भर लाखो महिलाओं, पुरुषों, बच्चों, छात्रों, आदि का आना जाना लगा रहता हैं। इस विषय पर अब तक "हरिद्वार की गूंज" की ओर से जिला प्रशासन के अलावा शहर के बड़े नेताओं को अवगत करा दिया गया है। दूसरा मामला कलेक्टर भवन की इमारत में कोष भवन का है जहाँ के महिला शौचालय पर इसलिए हमेशा ताला लगाया जाता है कि उसका प्रयोग वहाँ आने वाली महिलाएं न कर ले। इसके बारे में जब वहाँ के बड़े अधिकारी रत्नेश से बात करनी चाही तो पता चला कि वो छुट्टी पर है। उनकी अनुपस्थिति में वहाँ कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी ने बताया कि महिला शौचालय के पास ही एक अन्य पुरुष शौचालय है तो, अर्थात यदि किसी महिला को ट्रेजरी भवन में लघुशंका के लिए जाना है तो उसे पुरुष शौचालय में घुस जाना चाहिए। ये हाल कलेक्टर भवन का है। जबकि चित्र में देख सकते है कि पुरूष शौचालय का क्या सुंदर हाल है? कही पाइप नही तो कही साबुन नही। तीसरा बड़ा मामला बीएचईएल का है जो समाज मे अपनी भागीदारी दिखाने के लिए कभी किसी गाँव को गोद लेते हैं तो कभी सार्वजनिक स्थल पर जनता के लिए शौचालय बनावते है मगर दिये के नीचे कहावत को सिद्ध करते हुवे इनके यहाँ हरिद्वार की सबसे बडी पीठ बाजार जो कि सेक्टर 4 में लगती है वहाँ भी शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं। भगत सिंह चौक से लेकर शिवालिक नगर चौक तक इस रूट पर लाखों जनता आवागमन करती है मगर भेल हरिद्वार उन लोगो को पीने के पानी, शुलभ शौचालय देने में रुचि नहीं लेती। हा समय समय पर हरिद्वार प्रशासन को अपना आम जनता के लिए रास्ता नहीं देने के लिये जरूर इशारा कर देती है। मतलब साफ है कुल मिलकर जब सरकारी कर्मचारियों


, अधिकारियों और जिम्मेदार नेताओ की मानसिकता ही सफाई के प्रति दूषित और लापरवाही से भरपूर रहेगी तो स्वच्छ भारत अभियान फाइलों, पोस्टर, और बड़े बड़े होर्डिंग्स में तो दिख जायेगे मगर धरातल पर नही। साफ सफाई के विषय मे हरिद्वार के समाजसेवी नरेश गिरी की जितनी प्रशंसा की जाय कम है। वह व्यक्ति स्वयं की इच्छा पर अपना रेडा लेकर कूड़ा इक्कट्ठा करता है।
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