हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार के हाई वे पर प्रेमनगर आश्रम के पुल के निकट चौराहा जो कि दुर्घटना सम्भावित क्षेत्र है। यहाँ हर समय दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है, मगर उसके बावजूद यहाँ तैनात यातायात पुलिस या अन्य सम्बन्धित विभाग से यहाँ तैनात कर्मी अपनी डयूटी को गम्भीरता से नही लेते हैं। इससे पहले भी अखबार में समाचार प्रकाशित होने और बड़े अधिकारियों के संज्ञान में मामला डालने के बावजूद इस विषय मे कोई ठोस अनुशासनिक कार्यवाही नही हो पायी है। माना कि यहाँ तैनात पुलिसकर्मी भी इंसान ही है कई बार भुखे, प्यासे ड्यूटी करते हैं, मगर जो सम्भव हो सके वो तो किया ही जा सकता है। जैसे कि बारी बारी से ड्यूटी (यातायात नियंत्रण) किया जाय। यहाँ तैनात पुलिसकर्मियों से जब उनकी समस्या सुनी तो उनका कहना था कि बहुत कम चालक हमारे दिशा निर्देशो का पालन करते हैं। तो क्या यातायात व्यवस्था जनता के हाल पर दुर्घटना होने के लिये छोड़ दी जाय, जैसा कि चित्रों में दिख रहा है कि चौराहे से 100 मीटर दूर यातायात और पुलिसकर्मी आपसी बातों में लिप्त हैं और वाहन चालक एक दूसरे से पहले निकलने में लगे हुवे है। महिला पुलिसकर्मियों को अधिकतर मोबाइल में व्यस्त देखा जाता है, इससे पहले की वाहन चालकों या जनता की लापरवाही के कारण कोई बड़ी दुर्घटना हो यातायात और पुलिस विभाग को इस विषय मे आवश्यक सख्त कार्यवाही करनी ही होगी।
(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार के हाई वे पर प्रेमनगर आश्रम के पुल के निकट चौराहा जो कि दुर्घटना सम्भावित क्षेत्र है। यहाँ हर समय दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है, मगर उसके बावजूद यहाँ तैनात यातायात पुलिस या अन्य सम्बन्धित विभाग से यहाँ तैनात कर्मी अपनी डयूटी को गम्भीरता से नही लेते हैं। इससे पहले भी अखबार में समाचार प्रकाशित होने और बड़े अधिकारियों के संज्ञान में मामला डालने के बावजूद इस विषय मे कोई ठोस अनुशासनिक कार्यवाही नही हो पायी है। माना कि यहाँ तैनात पुलिसकर्मी भी इंसान ही है कई बार भुखे, प्यासे ड्यूटी करते हैं, मगर जो सम्भव हो सके वो तो किया ही जा सकता है। जैसे कि बारी बारी से ड्यूटी (यातायात नियंत्रण) किया जाय। यहाँ तैनात पुलिसकर्मियों से जब उनकी समस्या सुनी तो उनका कहना था कि बहुत कम चालक हमारे दिशा निर्देशो का पालन करते हैं। तो क्या यातायात व्यवस्था जनता के हाल पर दुर्घटना होने के लिये छोड़ दी जाय, जैसा कि चित्रों में दिख रहा है कि चौराहे से 100 मीटर दूर यातायात और पुलिसकर्मी आपसी बातों में लिप्त हैं और वाहन चालक एक दूसरे से पहले निकलने में लगे हुवे है। महिला पुलिसकर्मियों को अधिकतर मोबाइल में व्यस्त देखा जाता है, इससे पहले की वाहन चालकों या जनता की लापरवाही के कारण कोई बड़ी दुर्घटना हो यातायात और पुलिस विभाग को इस विषय मे आवश्यक सख्त कार्यवाही करनी ही होगी।



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