हरिद्वार की गूंज (
24*7)
(विभास सिन्हा) हरिद्वार। गत वर्षों की भांति इस वर्ष श्री चित्रगुप्त मंडल समिति श्री चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर दिनांक 9 नवम्बर को भव्य श्री चित्रगुप्त पूजन व् हवन आयोजित करने जा रही है हिंदी शास्त्रों के अनुसार चित्रगुप्त जी हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार वह देवता है, जिनका मुख्य काम संसार के सभी मनुष्यों के अच्छे –बुरे कर्मों का लेखा जोखा रखना है । भगवान चित्रगुप्त जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त जीवों के सभी कर्मों को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं और जब जीवात्मा मृत्यु के पश्चात यमराज के समक्ष पहुँचता है तो उनके कर्मों को एक-एक कर सुनाते हैं और उन्हें अपने कर्मों के आधार पर मृत्यु के बाद उन्हें स्वर्ग अथवा नरक में स्थान प्राप्त होता है।भगवान चित्रगुप्त सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के अंश से उत्पन्न हुए हैं । सृष्टि की रचना के क्रम में ब्रह्मा जी ने देव-असुर, गंधर्व, अप्सरा, स्त्री-पुरूष पशु-पक्षी को जन्म दिया, और धर्मानुसार जीवों को सजा देने का कार्य करने के लिये धर्मराज यमराज का जन्म हुआ। धीरे- धीरे संसार की आबादी बढ़ने लगी और जीवों को कर्म के अनुसार पुरस्कार अथवा दण्ड देने के क्रम में यमराज को कठिनाई होने लगी। तब धर्मराज यमराज ने ब्रह्मा जी से एक योग्य सहयोगी की मांग की। तब ब्रह्मा जी ब्रह्मा जी ध्यानलीन हो गये और एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद उनके (ब्रह्मा जी के) काया से एक पुरूष उत्पन्न हुआ; चूंकि इस पुरूष का जन्म ब्रह्मा जी की काया से हुआ अत: ये कायस्थ कहलाये और इनका नाम चित्रगुप्त पड़ा. ( चूंकि जब चित्रगुप्त जी का प्रादुर्भाव हुआ, उस समय ब्रह्मा जी भगवान विष्णु का ध्यान, अपने चित्त में गुप्त रख कर रहे थे, और तपस्या काल में हीं उस उत्तम पुरुष का जन्म हुआ अत: वे चित्रगुप्त कहलाए।
ब्रह्मा जी ने कहा कि हे उत्तम पुरूष आप चारों वेद, छहों, अठारह पुराणों के ज्ञाता हैं, आप प्रभु , शिवजी एवं दुर्गाजी की आराधना कीजिये और वर्णो के कर्मो का हिसाब रखिए।
ब्रह्मा जी से आज्ञा पाकर चित्रगुप्त जी कुटनगर पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने मां दुर्गा जी की उपासना की । दुर्गा जी ने श्री चित्रगुप्त जी को उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें लेखन कला की जानकारी दी। चित्रगुप्त जी भगवान का जन्म यम द्वितीय (भैया दूज के दिन)को  हुआ था और उनके जन्मदिन के रूप में कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को चित्रगुप्त जयंती पूजा मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो मनुष्य सच्चे मन से इस चित्रगुप्त भगवान की पूजा व् हवन करेगा वह परम् वैकुण्ठ धाम को प्राप्त करेगा।
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