हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। दुर्भाग्यपूर्ण है डोईवाला रानी पोखरी का पुल धड़ धड़ा कर जिस तरह आज गिरा कई गाड़ियां पुल के ऊपर से गुजरती हुई गिरी, जिस भी कम्पनी ने ये पुल बनाया है उसको ब्लैकलिस्ट करना चाहिए अधिकारियों से भी जवाब तलब करना चाहिए तथा राज्य सरकार के किस-किस अधिकारी की इस निर्माण में क्या भूमिका थी उसकी भी जांच होनी चाहिये। आम नागरिक के जान और माल की कोई कीमत नहीं है। जनता के द्वारा ही सरकारों को बनाया जाता है और बाद में जनता ही बेचारी ऐसी होती है जिसे कोई पूछने वाला नहीं रहता। अपने द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से मिलना ही एक आम जनता के लिए असंभव बात हो जाती है। आज इस तरह से लोगों के जीवन पर जो संकट आया है तथा वाहनों के क्षति ग्रस्त होने पर जो आर्थिक नुकसान हुआ है इसका जिम्मेदार कौन है? सड़कों पर लिए जाने वाले टैक्स की वसूली जनता से ऐसे की जाती है जैसे जनता पर कोई एहसान किया जा रहा हो, उसे सड़क सुरक्षा सड़क संबंधी सुविधाएं देने के लिए कभी-कभी तो टोल टैक्स वसूली के लिए आम जनता के साथ बहुत भद्दा व्यवहार भी किया जाता है ₹1 की मामूली छूट भी किसी को नहीं मिलती है। और उसके बाद ऐसे में जनता का जीवन सुरक्षित भी नहीं है सड़कों पर ऐसे में बड़ी दुविधा की स्थिति है, यह जनता की अपने द्वारा चुने गए प्रतिनिधि तथा उनके तथाकथित नज़दीकियों द्वारा इस तरह का व्यवहार किया जाता है जैसे शायद प्राचीन काल में राजाओं के दरबारियों द्वारा भी शायद जनता के साथ नहीं किया जाता हो और अब लोकतंत्र में इतना बुरा हाल है कि एक आम व्यक्ति की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। हम सब के लिए अत्यंत विचारणीय प्रश्न है। कि किस तरह से अपने भविष्य के लिए अपने प्रतिनिधियों को चुना जाए और क्या कोई सच में ऐसा प्रतिनिधि आएगा जनता के बीच में जो केवल जनता के हित के लिए ही कार्य करें।
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