(फिरोज अहमद) लक्सर। देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में इस समय कोरोना संक्रमण ने अपना कहर का खौफ बरपाया हुआ है ऐसे में मरीजों के लिए डॉक्टरों को भगवान माना जाता है। लेकिन आज एक अलग ही मामला प्रकाश में आया है। जहां डॉक्टर महिला मरीज को कोरोना का बहाना देकर उसके जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। पूरा मामला उत्तराखंड के ऋषिकेश मे स्थित एम्स अस्पताल का है। दें कि तहसील के समाजसेवी एडवोकेट पंकज गुप्ता ने एक गरीब पीड़ित महिला की मदद के लिए जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर उसके लिए मदद की गुहार लगाई है। पत्र में उन्होंने कहां है कि उत्तराखंड राज्य में जहां एक और कोरोना महामारी से जनमानस पीड़ित है वहीं दूसरी ओर अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज भी हैं। कोरोना पीड़ित मरीजों के साथ-साथ अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में उसी प्रकार से होना चाहिए जिस प्रकार से कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
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लेकिन राज्य में धरातल पर इसका बिल्कुल उल्टा हो रहा है। उन्होंने कहा एक महिला मरीज पुष्पा पत्नी रविंदर जो कि लक्सर केशव नगर सोसायटी रोड पर रहती है। जिसकी हालत बेहद ही नाजुक है और वह बहुत ही निर्धन गरीब परिवार से है। उन्होंने बताया उसका पति रेडी लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है। लगभग डेढ़ माह पूर्व उस महिला के एक हाथ में गैंग्रीन नाम की बीमारी हो गई जिसके चलते उन्हें ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका उपचार चल रहा था। उन्होंने बताया भर्ती रहने के दौरान डॉक्टरों ने महिला मरीज के हाथ के ऑपरेशन की बात कही, लेकिन जैसे ही ऑपरेशन करने का समय नजदीक आया तो एम्स के डॉक्टरों ने कोरोना का बहाना बनाकर उस महिला मरीज को आगामी उपचार देने के बजाय गंभीर हालात में ही हॉस्पिटल से छुट्टी देकर घर भेज दिया और चार हफ्ते के बाद आने के लिए बोला जबकि महिला मरीज की हालत नाजुक बनी हुई थी। उन्होंने बताया महिला मरीज के परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह अन्य जगह जाकर मरीज के सभी टेस्ट व ऑपरेशन करा सके उन्होंने पत्र में बताया एम्स अस्पताल में भर्ती के दौरान उनका टेस्ट व दवाइयों में लगभग 40 हजार रुपए का खर्चा आ चुका है। जो पीड़ित महिला के परिवार ने आसपास के लोगों से उधार लेकर एम्स को अदा किए हैं। उन्होंने बताया ऐसे में डॉक्टरों द्वारा उन्हें आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड मान्य ना होना बताया गया जिस कारण महिला मरीज को उसका भी कोई लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा ऋषिकेश एम्स के डॉक्टरों के इस रवैये के कारण पीड़ित महिला का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है और यदि जल्द से जल्द पीड़ित महिला मरीज का ऑपरेशन नहीं किया गया तो उनके जीवन पर संकट आ सकता है। उन्होंने हरिद्वार के डीएम, महानिदेशक चिकित्सा (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) मुख्य सचिव स्वास्थ्य मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर पीड़ित गरीब महिला का एम्स हॉस्पिटल में ऑपरेशन कराने के लिए मदद की मांग की है। बरहाल देखना यह होगा कि ऐसी करीब पीड़ित महिला की मदद के लिए उत्तराखंड का शासन प्रशासन क्या मदद करता है क्या हो पाएगा गरीब पीड़ित महिला का एम्स हॉस्पिटल में ऑपरेशन, या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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