हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। भारत स्वाभिमान पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के जिला प्रभारी आर्य प्रवीण वैदिक ने कहा कि प्राचीनकाल वाली योग और आयुर्वेदिक की खोई प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने में स्वामी रामदेव का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वामी जी ने योग और आयुर्वेद को प्रमाण और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ विश्व के सामने रखा है। स्वामी जी ने इसके लिये वैज्ञानिको के एक बहुत बड़े समूह के साथ पतंजलि अनुसंधान केन्द्र भी स्थापित किया हुवा है। यहाँ वैज्ञानिक शोध एवं विकास प्रक्रिया में संलग्न रहते हैं। इन्ही स्वामी रामदेव ने 25 वर्ष पूर्व योग को चिकित्सा पद्दति के रूप में समस्त विश्व के सामने प्रस्तुत किया था। तब आलोचकों ने कहा था कि फू फ़ा करने से भला रोग ठीक होते है, कहकर उपहास उड़ाया था। अब योग का महत्व सभी के सामने है कि अब 21 जून को विश्व के बहुत से देश योग दिवस मनाते है। योग के इतिहास में साधकों ने स्वीकार किया है कि योग करने से स्वस्थ रहते हैं बीमार नही पड़ते हैं। स्वामी रामदेव ने योग को चिकित्सा प्रणाली के रूप में प्रमाण और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ प्रस्तुत कर वैश्विक स्तर पर न केवल सिद्ध किया अपितु स्थापित किया। उसी प्रकार वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की स्वीकार्यता की कड़ी में उनके प्रयासों को देखें जाना आवश्यक है। स्वामी रामदेव ने बड़े खुले मन से एलोपैथ को आपातकाल चिकित्सा, शल्य चिकित्सा को स्वीकार किया है। आर्य प्रवीण ने कहा कि स्वामी रामदेव का बस इतना कहना है कि संसार में मानव हित के लिये जो जो हितकारी है उसका स्वागत कर स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने एलोपैथिक जगत से आयुर्वेद को प्रमाणिक एवं वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रोगानुसार चिकित्सा प्रणाली के रूप में सुनने समझने का आह्वान किया है। उन्होंने स्वामी रामदेव के कथन को विवाद में न लेकर मानव जगत के कल्याण के आलोक में देखे जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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