हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(गगन शर्मा) हरिद्वार। जी हां, आप किसी भी बैंक में जाओ तो वहाँ के सुरक्षाकर्मी बैंक की सुरक्षा भूलकर वहाँ आने वाले ग्राहकों के मुँह पर मास्क और सेनेटाइजर पर आजकल मेहनत करते मिलेंगे। इस पर एक जोक्स भी वायरल हुवा था कि किसी बैंक के कर्मचारी घबरा गए जब बैंक में कुछ नकाबपोश घुसे (उन्हें लगा कि कोरोना के रोगी न हो), मगर बैंक कर्मियों ने तब राहत की सांस ली जब पता चला कि ये नकाबपोश कोरोना रोगी नही बैंक लुटेरे है। मार्च 2020 जब से लॉक डाउन लगा, आवश्यक सेवा होने के कारण बैंकों में ग्राहकों का आना जाना लगा रहा। स्टाफ या अन्य ग्राहक किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा अन्य संक्रमित न हो इसके लिये ये भुलाकर मास्क अनिवार्य कर दिया कि कल यदि बैंक में कोई संदिग्ध व्यक्ति आता है तो उससे बैंक प्रबंधक कैसे निपटेंगे। यही हाल एटीएम का रहा जहां प्रत्येक व्यक्ति के प्रवेश पर मास्क अनिवार्य कर दिया गया। हालांकि कुछ महीने बाद ग्रह मंत्रालय की ओर से इस विषय में आवश्यक दिशा निर्देश जारी हुवे कि एटीएम में मास्क उतार कर प्रवेश करें। जबकि इस विषय मे यह भी हो सकता था कि एटीएम या बैंक के सुरक्षा कर्मी के वहाँ आने वाले ग्राहकों को दे कि वो सीसीटीवी कैमरे के सम्मुख 3 सेकेंड के लिये मास्क उतारकर प्रवेश करें। ताकि उसका चेहरा सीसीटीवी कैमरे में आ जाये। इसके अतिरिक्त जैसे कि चित्र में दिख रहा है कि बैंक का सुरक्षाकर्मी अपना कार्य छोड़कर बैंक की किताब की कम्प्यूटर में एंट्री कर रहा है। बैंकों के सुरक्षाकर्मी को आजकल बाबू (क्लर्क) बनने का बड़ा शौक लगा हुवा देखा जाता है वह अपनी मूल सुरक्षा की जिम्मेदारी छोड़कर अन्य कार्यो जैसे सेनेटाइजर देने में व्यस्त देखे जाते है। मामला तब और गम्भीर बन जाता है जब वहां के प्रबंधक सुरक्षा के लिये गार्ड को हस्तेक्षप नही करते। प्रत्येक जनपद के एसएसपी को चाहिए कि ऐसे बैंकों में मार्क ड्रिल कराकर सुरक्षा व्यवस्था को समय समय पर जांचे।
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