हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। भारतीय किसान यूनियन (किसान) के यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष राव फरमान अली ने कहा कि आज अन्न दाता सड़को पर है किसानों की करीब 200 से ज्यादा यूनियनें सरकार द्वारा बनाये गए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिये कह रही है। परंतु सरकार किसानों के प्रति गम्भीर नही है। राव ने कहा कि सरकार कह रही है कि मंडियों में सुधार के लिए और किसानों के जीवन में नया बदलाव लाने के लिए ये कानून बनाये हैं। परन्तु इस कानून में कही भी मंडियों के सुधार का जिक्र नही है। इस कानून में प्राइवेट कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर किसानों से खेती करवा सकेंगे। सरकार द्वारा इस कृषि कानून में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर भी कोई ठोस नियम नहीं बनाया गया है। राव का कहना है कि मंडियों में एमएसपी और पैसों की गारंटी किसानों को मिलती थी। लेकिन एमएसपी और पैसों की गारंटी मंडियों के बाहर नहीं होगी। इस कानून में एमएसपी से नीचे फसल खरीदने वालों पर एक्शन का भी कोई प्रावधान शामिल नहीं है। राव ने कहा कि इस कानून में धोखा है कानून लागू होने के कुछ समय तक तो कारपोरेट खरीदार एमएसपी से ऊपर फसलों को खरीद सकते हैं। परंतु एक,- दो साल होने के बाद जब मंडिया धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगी और एमएसपी का दबाव कॉरपोरेट खरीदार पर नहीं होगा। तो वह मनचाहे दामों पर किसानों की फसलें खरीद सकेंगे। किसानों के पास मंडी खत्म होने के बाद अपनी फसलों को कम दामों पर बेचने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा। राव ने कहा कि देश के विकास का रास्ता किसानों से ही होकर निकलता है। परंतु जब किसान ही लूट पीट जाएंगे। तो आम आदमी का क्या होगा। राव ने कहा कि आम जनता को भी किसानों के इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए। किसान इस देश का अन्नदाता है। पहले से ही किसान कर्ज में दबे पड़े चले आ रहे हैं। सरकार कर्ज माफ करने का दावा करती चली आ रही है परंतु धरातल पर किसी भी किसान का कोई कर्ज माफ नहीं हुआ है। जिसको लेकर किसान भाजपा सरकार में लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। और इस नए कृषि कानून ने तो उनकी कमर ही तोड़ कर रख दी है। राव ने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था के सुधार के नाम पर नोटबंदी लेकर आई थी। नोटबंदी को पूरे देश ने झेला है। अर्थव्यवस्था तो सुधरी नहीं परंतु नोटबंदी से भयावह परिणाम देखने को मिले हैं। 2016 से लगातार देश की अर्थव्यवस्था नीचे जा रही है। नोटबंदी और जीएसटी से  लाखों नौकरियां खत्म हो चुकी है और सैकड़ो जिंदगी खत्म हो चुकी है। राव ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने यह कृषि कानून वापस नहीं लिए, तो इस देश का अन्नदाता टूट जाएगा और आगामी समय में देश को भयावह परिणाम देखने को मिलेगे। इसलिए उन्होंने कहा कि इस कृषि कानूनों को शीघ्र सरकार वापस ले। राव ने यह भी कहा है कि जिन किसानों पर पराली जलाने के नाम पर मुकदमे किए गए हैं और जेल में डाला गया है उन सब किसानों को जेल से छोड़ा जाए और उनके मुकदमे खत्म किया जाए। इस मौके पर अमन कुमार, किसान नेता राव हामिद अली, राव काशिफ, यशपाल चौहान, राशिद अली, साजिद अब्बासी, किसान नेता बुला चौधरी किसान नेता आबाद अल्वी एडवोकेट राव शाहबाज अली आदि उपस्थित थे।

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