हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। मिहिर भोज जैसे महान शासक की जयन्ती पर नमन करते हुए कहाॅ कि देश को आज मिहिर भोज जैसे वीर पराक्रमी सम्राट की जरूरत है। उनके पद चिन्हो पर चलकर देश पुनः अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है। जिसके लिए सभी को संगठित होने की आवश्यकता है। मिहिर भोज के चरित्र एवं पराक्रम से जुडी घटनाओं का जिक्र करते हुए डॉ० शिवकुमार चौहान कहते है कि मिहिर भोज धर्म रक्षक क्षत्रिय राजपूत वीर सम्राट होने के साथ भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उनका जन्म 836 ईस्वीं में राजवंश घराने मे हुआ था। उन्होने 49 साल तक वीर सम्राट की तरह राज किया। मिहिरभोज के साम्राज्य का विस्तार आज के मुलतान से पश्चिम बंगाल तक और कश्मीर से कर्नाटक तक फैला हुआ था। ये धर्म रक्षक सम्राट शिव के परम भक्त थे। स्कंध पुराण के प्रभास खंड मे सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार के जीवन के बारे में विवरण मिलता है। 50 वर्ष तक राज्य करने के पश्चात वे अपने बेटे महेंद्रपाल को राज सिंहासन सौंपकर सन्यासवृति के लिए वन में चले गए थे। अरब यात्री सुलेमान ने भारत भ्रमण के दौरान लिखी पुस्तक सिलसिलीउत तुआरीख 851 ईस्वीं में सम्राट मिहिरभोज को इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताय है, साथ ही मिहिरभोज की महान सेना की तारीफ करते हुए मिहिर भोज के राज्य की सीमाएं दक्षिण में राष्ट्रकूट के राज्य, पूर्व में बंगाल के पाल शासक और पश्चिम में मुलतान के शासकों की सीमाओं को छूती थी। प्रतिहार का अर्थ रक्षक से है 915 ईस्वीं में भारत आए बगदाद के इतिहासकार अल- मसूदी ने अपनी किताब मरूजुल महान मेें भी मिहिर भोज की 36 लाख सैनिको की पराक्रमी सेना के बारे में लिखा है। इनकी राजशाही का निशान “वराह” था और मुस्लिम आक्रमणकारियों के मन में इनका खौफ रहता था। मिहिर भोज की सेना में सभी वर्ग एवं जातियों के लोगो ने राष्ट्र की रक्षा के लिए हथियार उठाये और इस्लामिक आक्रान्ताओं से लड़ाईयाँ लड़ी। सम्राट मिहिर भोज के मित्र काबुल का ललिया शाही राजा कश्मीर का उत्पल वंशी राजा अवन्ति वर्मन तथा नेपाल का राजा राघवदेव और आसाम के राजा थे। सम्राट मिहिरभोज के उस समय शत्रु, पालवंशी राजा देवपाल, दक्षिण का राष्ट्र कटू महाराज आमोधवर्ष और अरब के खलीफा मौतसिम वासिक, मुत्वक्कल, मुन्तशिर, मौतमिदादी थे। अरब के खलीफा ने इमरान बिन मूसा को सिन्ध के उस इलाके पर शासक नियुक्त किया था। जिस पर अरबों का अधिकार रह गया था। सम्राट मिहिर भोज ने बंगाल के राजा देवपाल के पुत्र नारायणलाल को युद्ध में परास्त करके उत्तरी बंगाल को अपने साम्राज्य का हिस्सा बनाया। दक्षिण के राष्ट् कूट राजा अमोधवर्ष को पराजित करके उनके साम्राज्य को अपने क्षेत्र में मिलाया। सिन्ध के अरब शासक इमरान बिन मूसा को पूरी तरह पराजित करके समस्त सिन्ध प्रतिहार साम्राज्य का अभिन्न अंग बना लिया था। केवल मंसूरा और मुलतान दो स्थान अरबों के पास सिन्ध में इसलिए रह गए थे कि अरबों ने क्षत्रिय प्रतिहार सम्राट के तूफानी भयंकर आक्रमणों से बचने के लिए अनमहफूज नामक गुफाए बनवाई हुई थी जिनमें छिप कर अरब अपनी जान बचाते थे। ऐसे वीर सम्राट की जयन्ती पर हम सब उनकों अपने श्रद्वा सुमन अर्पित करते है।



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