हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत और भाजपा में बगावती तेवर अपनाने वाले विवादास्पद विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन में पूरी तरह से समानता है। दोनों अपने बयानों और कारनामों से हमेशा चर्चा में रहते हैं, चैंपियन को भाजपा ने पार्टी से हमेशा के लिए पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोलने और पहाड़ियों के बारे में गलत बयानी करने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया था। परंतु भाजपा के राज्यसभा सदस्य राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी के विरोध के बावजूद चैंपियन को पार्टी में वापस ले लिया गया। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव और हरिद्वार जिले में होने वाले जिला पंचायत चुनाव को देखते हुए फिर से उन्हें भाजपा में शामिल किया। देहरादून में जब वे पार्टी में शामिल होने के बाद रुड़की अपने गांव लंढोरा रवाना हुए तो उनके समर्थक उनके स्वागत में हवा में हथियार लहराते हुए उनके साथ चल रहे थे, जिससे वे फिर विवाद में आ गए और पार्टी ने फिर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। चैंपियन का गुर्जर जाति में प्रभाव है और भाजपा ने विधानसभा और जिला पंचायत हरिद्वार के चुनाव में भाजपा को गुर्जर बिरादरी के वोट लेने हैं, इसके लिए मजबूरी में चैंपियन की पार्टी में वापसी हुई। कुंवर प्रणव सिंह बॉडीबिल्डर रहे हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते हैं। इसलिए अपने नाम के आगे चैंपियन लिखते हैं, और अब वे राजनीति के भी चैंपियन हो गए हैं, दबंग है, जनाधार वाले नेता है, और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन लंढोरा रियासत के राजकुमार है, उनके पिता हुआ नरेंद्र सिंह का इस क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव है और बेहद इज्जत है। जिसका फायदा चैंपियन को मिलता है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत नैनीताल जिले के हल्द्वानी क्षेत्र में रामलीला के कलाकार रहे हैं और आज भी रामलीला के मंच पर किरदार निभाते हैं और दशरथ का रोल करते हैं। परंतु राजनीति में अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। अभी वे एक टीवी चैनल को लेकर फिर विवाद में फंस गए, उन्होंने उत्तराखंड भाजपा के विधायकों को 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर नसीहत देते हुए एक टीवी चैनल में दिए गए साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लहर के सहारे अब किसी की नैय्या पार नहीं होगी। विधायकों को खुद मेहनत करनी होगी। क्षेत्र में जाकर काम करना होगा। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो राजनीति में हड़कंप मच गया और कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों हाथ ले लिया, जिससे भाजपा राज्य की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार सकते में पड़ गई और कांग्रेस ने इस बहाने भाजपा सरकार पर निशाने साधने शुरू कर दिए। जिस पर भगत को भाजपा हाईकमान से लताड़ पड़ी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को अपना स्पष्टीकरण देना पड़ा। जबकि वे अब तक भाजपा के विवादास्पद विधायकों से स्पष्टीकरण मांगते रहते थे और अभी खुद ही कठघरे में आ गए हैं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत के बारे में कहा जाता है कि वे शाम को अपने रंग में रंग जाते हैं और किसी से मिलना पसंद नहीं करते हैं।
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हरिद्वार की गूंज: भगत और चैंपियन में समानता, दोनों अपने बयानों और कारनामों से हमेशा रहते हैं चर्चाओं में, पढ़िए
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