हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। कोरोना महामारी पर नियंत्रण हेतु केंद्र सरकार को मार्च के महीने से पूरे देश मे लॉक डाउन लगाना पड़ा था। जिसके कारण अब तक सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव कोचिंग और कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट पर पड़ा है। इस तरह की अधिकांश शिक्षण संस्थान किराए की दुकानों या भवन में अपनी रोजी रोटी पर निर्भर करती हैं। धीरे धीरे  अनलॉक 1, अनलॉक 2 में अन्य संस्थानो को खोलने की तो अनुमति मिलती गयी मगर इन शिक्षण संस्थानों के प्रतिमाह बिजली बिल, किराया, ट्रेनरों सहित अन्य स्टाफ की सैलरी के खर्चो, परिवारिक खर्चो के बारे में किसी राज्य या भारत सरकार ने चिंता करने की जरूरत नही समझी। ऐसे शिक्षण संस्थानों के कई मालिको को प्रतिमाह वाहन, भवन, आदि की लोन क़िस्त देनी होती है। जो कि उनके लिये बहुत बड़ी सिरदर्दी बनी हुई हैं। ऐसे इंस्टिट्यूट के संचालक चाहे तो वो ऑनलाइन कार्य करते हुवे अपने पूर्व छात्रों को फ़ोन करके डिस्टेन्स मोड़ पर यूनिवर्सिटी लेवल पर भी कार्य कर सकते हैं। इन दिनों काफी यूनिवर्सिटी आपको ऐसी मिल जाएगी जो डिस्टेन्स मोड पर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन कराती हैं। इस तरह ऐसे इंस्टिट्यूट का जो लॉक डाउन में आर्थिक हानि हुई है वो किसी हद तक कम हो सकती हैं। क्योंकि यदि थोड़ी सी मेहनत और इंस्टिट्यूट के पूर्व छात्रों का डेटा इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योकि यूनिवर्सिटी के एडमिशन में प्रतिवर्ष आमदनी बढ़ती है उससे इंस्टिट्यूट की जो आमदनी बढ़ेगी उससे इंस्टिट्यूट को एक आय का एक अतिरिक्त साधन प्राप्त होगा। इतिहास गवाह हैं कि पराधीनता शिक्षण संस्थान की हो या जॉब की सदा दुखदाई ही रहती हैं।
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