हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। भारत देश की शिक्षा व्यवस्था का ये हाल है कि देश के भविष्य लड़का हो लडक़ी वो सर पर हैलमेट हो या चेहरे पर मास्क मजबूरी में पहनते हैं न कि स्वयं की सुरक्षा में। ज्वालापुर अंतर्गत वानप्रस्थ आश्रम में बने डाकखाने में संविदा के आधार पर कार्य करने वाली नेहा फ्रंट डेस्क पर मोर्चा संभालते हुवे डाकखाने में आने वाले बुजुर्ग, जवान और बच्चों अर्थात हर वर्ग के उपभोक्ताओं का सामना करती है। शिक्षित, बालिग होने के बावजूद वह उन दिनों चेहरे पर मास्क लगाना जरूरी नही समझती जब कोरोना हरिद्वार में तेजी से फैल रहा है।
इस विषय मे जब डाक खाने के पोस्ट मास्टर संजय से पूछा तब उन्होंने उस लड़की से उसके मास्क न लगाने के बारे पूछा। उसके बाद भी वह कोई संतोषजनक उत्तर नही दे पायी। हालाकि नगर निगम और हरिद्वार पुलिस निरन्तर मास्क न लगाने पर जुर्माना लगा रही हैं मगर यहाँ डाक खाने में कार्यरत नेहा को लगता है कि वो सरकारी जगह बैठी है यहां उससे मास्क न लगाने के बारे में पूछने की किसकी हिम्मत। कोरोना पर अंकुश लगाने और इस महामारी की रोकथाम के लिये हरिद्वार प्रशासन को चाहिए कि ऐसे लापरवाह जनता पर फोटो के आधार पर जुर्माना लगे। ताकि इनकी लापरवाही किसी अन्यो पर भारी न पड़े।




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