हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। मानव अधिकार संरक्षण समिति द्वारा गुरू पूर्णिमा कार्यक्रम के अवसर पर गुरू की महत्ता तथा बिना गुरू के व्यक्ति का जीवन अर्थहीन रह जाता है। प्रान्तीय सचिव हेमन्त सिंह नेगी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर गुरू का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए कहा कि शास्त्रों में गु शब्द का अर्थ अंधकार या मूल अज्ञान और रु शब्द का का अर्थ निरोधक है। अर्थात दो अक्षरों से मिलकर बने गुरु शब्द का अर्थ  अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाला सही अर्थो में गुरु है। कनखल नगर अध्यक्षा रेखा नेगी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कहा कि बाहर की वस्तुओं का भले ही हमें ज्ञान हो जाए, हम कितने ही बड़े पद पर आसीन हो जाए, परन्तु बिना भीतरी ज्ञान के सब कुछ व्यर्थ है। बाहरी ज्ञान, मन-बुद्धि का ज्ञान-विज्ञान है परन्तु आध्यात्मिक ज्ञान मन से परे परमात्मा का ज्ञान है। गुरु हमारे जीवन को सही दिशा देते है, उनके मार्ग दर्शन से ही जीवन सफल होता है। छात्र जीवन में गुरु का महत्व होता है उसी प्रकार समाज में बुजुर्गों को भी गुरू का दर्जा दिया जाता है। जो अनुभव के आधार पर समाज को बुराईयों से दूर रखने का प्रयास करते है। रेखा नेगी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह अध्यात्म-जगत की सबसे बड़ी घटना के रूप में जाना जाता है। पश्चिमी देशों में गुरु का कोई महत्व नहीं है, वहां विज्ञान और विज्ञापन का महत्व है परन्तु भारत में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। यहां की माटी एवं जनजीवन में गुरु को ईश्वर तुल्य माना गया है, क्योंकि गुरु न हो तो ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग नही प्राप्त हो सकता। गुरु ही शिष्य का मार्गदर्शन करते हुए जीवन को ऊर्जामय बनाते एवं संवारने का काम करते हैं।
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