हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। मनुष्य जीवन कुदरत की सबसे अनमोल नियामत है। असंख्य जन्म के शुभ कर्मो का संचय होने पर यह दुर्लभ मानव शरीर प्राप्त होता है। साधन बिना श्रम की सिद्वि संभव नही है। इसलिए मानव शरीर द्वारा ही सिद्वि प्राप्त किया जाना संभव है। यह विचार गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान एवं स्वास्थ्य संकाय के अन्तर्गत शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ0 शिव कुमार चैहान ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मानव कल्याण के लिए समर्पित राजस्थान, जयपुर की एक सामाजिक संस्था मंगलायतन द्वारा सोमवार को आयोजित नेशनल वेबीनार विश्व शान्ति मे योग की प्रासंगिता विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। डाॅ0 कुमार ने कहाॅ कि योग ने व्यक्ति को स्वस्थ जीवन यापन के लिए प्राणायाम एवं साधना जैसी दुुर्लभ क्रियाये दी है। जिसमे प्राण मे आयाम द्वारा श्वसन की प्रभावी प्रक्रिया सीखकर जीवन मे कार्य शक्ति को बढाने मे मदद मिलती है। वही साधना को अंगीकार करते हुए परमात्मा प्राप्ति के लक्ष्य की ओर बढा जा सकता है। इसी लक्ष्य को साध्य मानकर योगी समाधि तक पहुॅचता है जहां वह परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का दर्शन पाता है और दिव्य सुख की प्राप्ति करता है जो औरो के लिए संभव है। योगी अथवा साधक द्वारा साधना को ही मृत्युपरान्त साथ जाने वाला धन कहा गया है। वेबीनार के डायरेक्टर डाॅ0 संजय अवस्थी ने कहाॅ कि योग मनुष्य के कल्याण की राह है। योग की क्रियाओं को जीवन मे आवश्यक कार्य के रूप में सम्मिलित करना आवश्यक है। वेबिनार का संचालन डाॅ0 मिथलेश पाण्डेय तथा डाॅ0 अनिल कुमार के संयोजन मे सम्पन्न हुआ।



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