हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। आज जिला भाजपा कार्यालय हरिद्वार पर जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर जिला पदाधिकारियों के द्वारा श्रद्धांजलि दी गई, उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष डॉक्टर जयपाल सिंह चौहान ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी हम सबके प्रेरणा स्रोत है उनके द्वारा किए गए कार्यों को हम आत्मसात करते हुए भारतीय जनता पार्टी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का काम करेंगे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे व्यक्तित्व के लोग विरले ही होते हैं डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जीवन के 52 साल के अंतिम 14 साल राजनीति में बिताएं इस अल्पावधि में वे महानतम ऊंचाइयों को छू कर इतिहास में अमर हो गए उनका जन्म 6 जुलाई1901 में कोलकाता में हुआ था बंगाल टाइगर के नाम से मशहूर महान शिक्षाविद श्री आशुतोष मुखर्जी के दूसरे पुत्र डॉक्टर मुखर्जी ने अपने जीवन का प्रारंभ शिक्षाविद तथा एक वकील के रूप में किया। जिला महामंत्री विकास तिवारी ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी कोलकाता विश्वविद्यालय के सिंडिकेट केवल 23 साल की उम्र में सबसे युवा सदस्य के रूप में सम्मिलित हुए एवं 33 साल की उम्र में वे विश्वविद्यालय के उप कुलपति बने 1934 से 1938 तक उन्होंने कुलपति के रूप में दो कार्यकालओं का निष्ठा के साथ निर्वहन किया राष्ट्रवादी विद्वानों को उन्होंने भरपूर सहयोग एवं समर्थन दिया भारतीय इतिहास संस्कृति तथा पुरातत्व के संबंध में उनकी गहरी रुचि रही डॉक्टर मुखर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया तो उन्होंने बंगाल की मुस्लिम लीग सरकार के भयावह तौर-तरीकों के विरुद्ध संघर्ष को आगे बढ़ाया नेहरू सरकार के गठन में उद्योग राज्यमंत्री के रूप में सम्मिलित हुए 1950 में पाकिस्तान में हिंदुओं की दयनीय स्थिति में देखते हुए तथा नेहरू लियाकत समझौते के विरोध में मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया नेहरू जी की जम्मू एवं कश्मीर के संदर्भ में हिंदू विरोधी एवं पाकिस्तान परस्त नीतियों के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक गुरु गोलवलकर से मिले विचार विमर्श के उपरांत एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का संकल्प लिया जिसमें मुखर्जी के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बलराज माधो, अटल बिहारी वाजपेई ,कुशाभाऊ ठाकरे, नानाजी देशमुख, सुंदर सिंह भंडारी, जगदीश प्रसाद माथुर जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दल की जिम्मेदारी दी गई जिसके फल स्वरुप भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई डॉक्टर मुखर्जी ने नेहरू जी से कश्मीर में परमिट एवं दो प्रधान दो निशान को दूर करने को कहा लेकिन उस समय नेहरु जी ने उसको नजरअंदाज किया तब डॉक्टर मुखर्जी ने आंदोलन की शुरुआत करते हुए इसका विरोध करने का निर्णय लिया और बिना परमिट के ही जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया रहस्यमय तरीके से 23 जून 1953 सुबह 3:40 पर अंतिम सांस ली लेकिन इस अल्पावधि की राजनीति में उन्होंने देश में एक प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई और देश की एकता अखंडता के लिए संकल्प बंद होकर काम किया हम सब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता उनके दिखाएं सिखाई मार्ग पर आगे बढ़े उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर हम भारतीय जनता पार्टी को नई ऊंचाई तक ले जाने का काम करें इसी क्रम में हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने डॉक्टर मुखर्जी के सपनों को साकार करने का काम कर रहे हैं धारा 370 एवं 35a हटाया जाना उसी दिशा मे महत्वपूर्ण कदम है दिन और रात लगातार बिना थके काम कर रहे हैं विगत 6 वर्षों में आम आदमी के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू की एवं देश की एकता अखंडता स्वाभिमान एवं आत्मनिर्भर भारत का जो बड़े प्रयास शुरू किए हैं हम सब इस बात का संकल्प लेते हुए कि हम स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देकर देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपना अपना योगदान देंगे आज के अवसर पर डॉक्टर मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। इस अवसर पर जिला महामंत्री विकास तिवारी, आदेश सैनी जिला उपाध्यक्ष अनिल अरोड़ा, संदीप गोयल जिला मंत्री आशु चौधरी, अनामिका शर्मा, जिला कार्यालय प्रभारी लव शर्मा, जिला सोशल मीडिया प्रभारी मोहित वर्मा, डॉ विजेंद्र चौहान उपस्थित रहे।



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