हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। ग्राम पंचायत सालियर साल्हापुर ग्राम प्रधान पर मनरेगा मजदूरों ने मजदूरी गबन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान ने हमारी मेहनत मजदूरी का पैसा गबन कर लिया है। बार-बार पैसा मांगने पर भी ग्राम प्रधान हम लोगों को गुमराह कर रही है। लगातार कहां जा रहा है कि तुम्हारा पैसा तुम्हारे अकाउंट में आ जाएगा। लेकिन कुछ मजदूर द्वारा अकाउंट चेक कराने पर अकाउंट में कोई पैसा नहीं आया है। फिर ग्राम प्रधान से पता करने पर उन्होंने कहा कि तुम्हारा पैसा जल्द आ जाएगा। और बार-बार यही आश्वासन दिया गया। मजदूरों का जब पैसा अकाउंट में नहीं आया, तो किसी की मदद से ऑनलाइन पैसा चैक किया गया। जिसमें यह खुलासा हुआ है कि ग्राम प्रधान द्वारा फर्जी अकाउंट खोल कर उससे सभी मजदूरों का पैसा निकाल जा रहा है। इस बात से पीड़ित होकर मजदूरों ने मुख्य विकास अधिकारी को लिखित में अवगत कराते हुए तत्काल इस पूरे मामले की जांच करने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि लेकिन लॉकडाउन की वजह से अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, मजदूरों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते ग्राम प्रधान से हमे कोई फायदा नही हुआ है और ना ही किसी तरह की कोई राशन सामग्री की मदद दी गई है और हम मनरेगा मजदूरों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं समाजसेवी मोनिका ने ग्राम प्रधान पर मजदूरों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए बताया है कि ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा मजदूरों की मजदूरी के साथ साथ शौचालय और सड़कों में भी बड़ा घोटाला किया गया है। मोनिका ने कहा है कि कुछ लोगो को कागजों में डबल शौचालय देना भी सामने आया है। जो जनता की आंखों में धूल झोंकने के साथ-साथ सरकार की आंखों में भी धूल झोंकने का काम है। उन्होंनेे कहा कि ब्लॉक के अधिकारी भी भ्रष्टाचारी के मामले में लिप्त है। 25 पत्र देने के बाद भी इस पूरे मामले को घुमाया जा रहा है। समाजसेवी मोनिका और सभी मनरेगा मजदूरों ने कहा है कि इस पूरे मामले को लेकर जल्द ही वह जिलाधिकारी हरिद्वार से मुलाकात कर भरष्टाचार के मामले से अवगत कराएंगे। मामले का निस्तारण नहीं होता है तो वह आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। वहीं बीडीओ ब्लॉक रुड़की संतोष रौतेला से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि यह पहला मामला है और पैसों का कोई गबन नहीं हुआ है और इसमें मैंने जांच कराई है जांच की रिपोर्ट आते ही आपको अवगत कराया जाएगा। लेकिन जब जिलाधिकारी के आदेश होने की बात कही गई तो उन्होंने कहा है कि हां आदेश तो हुआ है और इसमें में जल्द ही लोकपाल आयोग द्वारा जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही आपको पूरी डिटेल दे दी जायेगी। बीडीओ संतोष रौतेला ने यह भी कहा है कि यह 2011 का मामला है जो कि बहुत पुराना है। वीडीओ कालूराम त्यागी नेे बताया कि अभी जांच नहीं हुई है और प्रधान से इसका जवाब मांगा गया है यह मामला मेरे से पहला है मैैं 2018 में यहां आया था। और ना ही मुझे किसी के अकाउंट खुलने का पता है और यह जानकारी आप प्रधान से प्राप्त करेें। वीडीओ त्यागी से फर्जी अकाउंट खोलने पर पूछा गया तो उन्होंने कहा है कि कोई फर्जी अकाउंट नहीं खुला है और बिना व्यक्ति के अकाउंट खुल ही नहीं सकता है। वहीं प्राप्त जानकारी से पता चला है कि इसी संबंध से जुड़ा फर्जीवाड़ा एक मामला ओर सामने आया है कि फर्जी तरीके से एक अकाउंट से पैसे निकालने को लेकर पीड़िता द्वारा मुकदमा भी दर्ज कराया गया था और एक मिनी बैंक के कर्मचारी को भी निलंबित किया गया था। यह भी जानकारी हाथ लगी है कि ओबीसी को एससी में दर्शाया कर फर्जी अकाउंट खोला गया था और 11400 की धनराशि निकाली गई थी। इस संबंध में वीडीओ कालूराम का कहना है कि मैं कुछ नहीं जानता यह मामला 2017 का है। आपको बता दे कि इसका खुलासा सूचना अधिकार से प्राप्त हुआ था। वीडीओ कालू राम त्यागी से इस विषय में बात की गई और जांच कब तक होगी पता किया गया तो उन्होंने कहा है कि अभी कोई जांच नहीं हुई है और प्रधान से जवाब तलब किया गया है। मामला लोकपाल आयोग में है और हम साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति है। और सही जानकारी आपको ग्राम सचिव अशोक कुमार देंगे। जो अब नारसन ब्लॉक में है। कालूराम त्यागी का यह भी कहना है कि 7 से 8 व्यक्तियों ने प्रधान के पक्ष में एफिडेविट भी दिए हैं और 10 लोग है जो विरोध कर रहे है।आपके बता दे कि जैसे भ्रष्टाचारी के परिक्रमण में अधिकारी, कर्मचारी कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं।वहीं सालियर ग्राम प्रधान से जब इस मामले पर बात करनी चाही तो उन्होंने खुद बात न करते हुए अपने प्रतिनिधि से बात कराई है। प्रतिनिधि सेट राज का कहना है कि यह जो आरोप लगे है यह सब झूठे है और कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है और हम लोगों को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। किसी जमीन के मामले को लेकर रंजिश निकाली जा रही है। हमने कई बार पहले भी जांच कराई है और आप पूरे गांव वालों से भी जानकारी कर सकते हो और प्रधान जी से भी जल्द ही बात करा दी जाएगी। अब देखने वाली बात यह है कि प्रधान ने खुद ना बात कर अपने प्रतिनिधि से बात कराई है और अपना पल्ला झाड़ते हुए किसी जमीन का जिक्र करके इस पूरे मामले को गुमराह करने का काम किया जा रहा है। हालांकि जमीन का मामला चकबंदी अधिकारियों से जूड़ा है और मनरेगा मजदूरों का जो मामला है चाहे मनरेगा शौचालय सड़कों का हो वह प्रधान से जुड़ा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि कही न कही ग्राम प्रधान और अधिकारियों की मिलीभगत के शिकार मनरेगा मजदूर हुए हैं। अब देखना होगा कि आखिरकार आला अधिकारी कब तक इस भ्रष्टाचारी के खेल को दूध का दूध पानी का पानी करते हैं और भ्रष्टाचारी में लिप्त लोगों पर किस तरह की कार्रवाई करते हैं।
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