हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार ही नही उत्तर प्रदेश के बाद पूरे उत्तराखंड की पहली शिक्षिण संस्था जिसने अपने शत प्रतिशत छात्रों की फीस माफ करके एक आदर्श सराहनीय पहल की है। ऐसा भी नही कि इस विद्यालय के संचालको ने अब तक अपने स्टाफ का वेतन ही रोका हो। जी हाँ हम बात कर रहे हैं हरिद्वार सिडकुल निकट रावलीमहदूद के देवभूमि इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की, छात्रों को वैदिक गणित, कंप्यूटर शिक्षा, इंडोर गेम, वाद विवाद प्रतियोगिता, संगीत शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, विज्ञान लैब, बास्केटबॉल, इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स जैसी अत्याधुनिक शिक्षा देने वाले इस विद्यालय के संचालक जितेंद्र पाठक का कहना है कि शिक्षा के बाजारीकरण के विरुद्ध और छात्रों में समाज-देश के प्रति उत्तरदायित्व को समझाने को लेकर 3 वर्ष पूर्व स्कूल की नींव रखी गयी थी। पिछले तीन वर्ष में इस स्कूल के संचालको को देखा गया है कि उन्होंने धन अर्जित करने की अपेक्षा समाज, पुलिस प्रशासन की मदद करने को अपना मिशन बनाया हुवा है। आचार्य मुक्ति नारायण झा एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित यह शिक्षिण संस्था कभी दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से हेलमेट वितरण तो कभी कोरोना महामारी में भूखों जरूरमन्दों की मदद करते हुवे देखा गया है। हरिद्वार ही नही अपितु उत्तराखंड के छोटे बड़े, ब्रेंड नेम वाले शिक्षण संस्था रूपी व्यापारी लोग तड़फ रहे है कि ऑनलाइन क्लास के माध्यम या अन्य किसी बहाने से कैसे अभिभावकों की जेब से फीस निकाली जाय। तो वही इस देवभूमि इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की ओर से कोरोना महामारी के दौरान सेनेटाइजर, मास्क की निःशुल्क व्यवस्था कराना, जरूरतमंदों की कच्चे राशन, द्वारा मदद करना सराहनीय कदम रहा। यही ही नही अभिभावकों के आय के श्रोत को देखते हुवे अप्रेल, और मई के महीने की मासिक शुल्क भी माफ कर दिए गए हैं। स्कूल की प्रधानाचार्या प्रीति पाठक ने बताया कि अपने स्कूल द्वारा भी ऑनलाइन क्लास की सुविधा दी जा रही हैं,अभिभावकों की जेब से फीस निकालने के उद्देश्य से नही बल्कि छात्र घर पर रहकर अनावश्यक रूप से मोबाइल वीडियो गेम, टीवी में कार्टून में रोकने के उद्देश्य से स्कूल प्रशासन की ओर ऑनलाइन क्लासेस दी गयी। स्कूल संचालक जितेंद्र पाठक का कहना है कि धन कमाने के हमारे पास अन्ये बहुत से विकल्प थे मगर जब देखते हैं कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद युवा बेरोजगार है, वह किसी के भी बहकावे में आकर अपनी मांगे मनवाने के लिये सड़क, रेल रोककर आगजनी करने में पीछे नही रहता है। तो हमने एक ऐसे शिक्षिण संस्था की नींव रखने की ठानी जहाँ का छात्र भविष्य का अब्दुल कलाम, स्वामी विवेकानंद, भीमराव अम्बेडकर, सरदार पटेल बनकर देश को विकसित बनाने में अपना योगदान दे।
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