हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। पुलिस पर बढता मानसिक दबाव सामाजिक परिवेश मे रहने वाला व्यक्ति उम्र के सापेक्ष अलग-अलग दायित्वों की पूर्ति करता है। इस दायित्व की पूर्ति में उसका व्यक्तिगत जीवन तथा कार्य-क्षेत्र दोनो मे तालमेल बनाए रखना जरूरी होता है। अनुकूल तथा प्रतिकूल स्थिति व्यक्तिगत जीवन तथा कार्य-क्षेत्र दोनो में ही देखने को मिलती है। आधुनिकता से पोषित आज के समाज मे पुलिस का कार्य-क्षेत्र गंभीर तथा कठिन चुनौतियों से भरा हुआ है। ये चुनौतियाॅ एक नये रूप में आकर पुलिस की कार्यशैली तथा उसके व्यवहार को प्रभावित करती है। मनोवैज्ञानिक रूप से उनके व्यवहार मे सख्ती तथा कठोरता का समिश्रण देखने को मिलता है। सामाजिक सौहार्द्र बिगडना, अनुशासनहीनता, हिंसक तथा प्रताडनाओं जैसी घटनाएं, चोरी, डकैती, लूटमार, रेप जैसी समाज मे व्याप्त बुराईयों से पुलिस को रोज ही रू-ब-रू होना पडता है। चीत्कार तथा हा-हाकार से जुडी घटनाएं पुलिस के मानवीय मूल्यों को समाप्त करने तथा उनके व्यवहार में कठोरता उत्पन्न कर रही है। मर्यादाएं, सत्य, निष्ठा, परोपकार, त्याग तथा समर्पण की भावना आदि नैतिक मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन का उददेश्य लेकर पुलिसकर्मी का कार्य-क्षेत्र मनुष्य के संवैधानिक हितों की रक्षा करने के लिए बनाया गया था। कोरोना महामारी के कारण लोगों को सुरक्षित रखने तथा लाॅकडाउन का पालन के लिए रात दिन की भागदौड भरी जिंदगी, संक्रमित लोगों की पहचान करना तथा उन्हे क्वारंटीन करना, निगरानी रखना ताकि वह किसी अन्य के सम्पर्क में न आएं नये कार्य भी पुलिसकर्मियों के कार्य-क्षेत्र मे जुड गए है। मनोवैज्ञानिक सिद्वान्तों के आधार पर कठिन कार्यो को करने वाले के व्यवहार मे कठोरता आना स्वभाविक है। परन्तु जब यह कठोरता शारीरिक तथा मानसिक स्थिति को प्रभावित करने लगे तब स्थिति जोखिमपूर्ण बन जाती है। शारीरिक तथा मानसिक विश्राम के अभाव मे तनाव, चिन्ता, अनिद्रा, एंग्जायटी, अवसाद, मानसिक दबाव जैसी अनेक मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो जाने से कार्य-क्षेत्र से जुडेे दायित्वों मे रूकावट आ जाती है। कोरोना तथा लाॅकडाउन की स्थिति से निपटने में जहां उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही  है वही उनके संक्रमित होने की संम्भावना भी बढ रही है। इन्कार नही किया जा सकता है। कई बार इन स्थितियों को नियंत्रित करने मे इन्हे जनसामान्य के गतिरोध का भी सामना करना पडता है। कानून का पालन तथा स्थिति सामान्य हो इसके लिए प्रयास करने पडते है तथा मन को संतुलित रखना पडता है।  
सही अर्थो में पुलिसकर्मी समाज के योद्वा है। इनका सम्मान होना ही चाहिए। इनके व्यवहार मे अनुकूलता तथा मनःस्थिति पर उत्पन्न दबाव को भी दूर करना चाहिए। समाज की बेहतर सुरक्षा तथा पुलिसकर्मियों के कार्यक्षेत्र को प्रभावित करके सम्भावित खतरा कम किया जा सकते है।
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