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(इमरान देशभक्त) रुड़की। जनशक्ति विकास संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौ.आरिफ खान ने बताया कि इस्लामी कलैन्डर के मुताबिक नौवा महीना रमजानुल मुबारक का महीना होता है। यह रहमत व बरकत वाला महीना है। इस माह में अल्लाहताला ने मुकदद्स कुरान नाजिल किया, रमजानुल मुबारक के महीने में हर दौलतमन्द लोगों को अपने माल का 2.5 फीसद जकात देना फर्ज है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौ.आरिफ खान ने इस्लामिक भाइयों से पुरजोर गुजारिश की है कि करोना महामारी के बीच लॉकडाउन में जकात का पैसा गरीबों बेसहारा, जरूरतमंदों को देकर अल्लाह ताला का फर्ज अदा करें।हर शख्स को फितरा देना भी फर्ज है। रमजान के महीने में अल्लाह के रसूल के फरमान के मुताबिक जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बन्द कर दिये जाते है। माहे रमजान मुबारक की बरकत से हर फर्ज इबादतों के बदले सौ गुना नेकियां नामेंआमाल में लिख दी जाती हैं।संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौ.आरिफ खान ने कहा कि रोजा केवल भुखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि इस माह मुबारक में अपने नफ्स को हर बुराई से रोकते हुए नेक कामों को किये जाने का नाम रोजा है। रमजान महीने का रोजा हर बालिग मोमिन मुस्लमान पर फर्ज है।रमजान का महीना बेहद पाक व रहमत वाला महीना है। रोजदारों को अपने नफ्स के साथ-साथ आंख, हाथ, दिल व जुबान से कुछ भी बुरा करने से परहेज करना चाहिए। रमजान महीने की शुरूआत होते ही यानि चांद रात से ही नमाजे ईशा के बाद विशेष नमाज बीस रकाअत तरावीह अदा की जाती है। अल्लाह इस महीने में रहमतों की बारिश करता है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौ.आरिफ खान ने बताया कि कुरान मे आया हैं कि ए ईमानवालों तुम पर रोजा फर्ज किया गया है, ताकि तुम परहेजगार बनों, रमजानुल मुबारक को तीन अशरा (भागों) में बांटा गया है। रमजान का पहला अशरा एक से दस रमजान का है इसमें रहमतो की बारिश होती है, ग्यारह से बीस रमजान तक जहन्नुम से निजात पाने का व अंतिम अशरा में 21, 23, 25, 27, 29 मुकदद्स व पाक रातें हैं, जिन्हें सबेकद्र की रात कहा जाता है।इन रातों की इबादत हजार महीनों से बेहतर है।
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