हरिद्वार की गूंज (24*7)
डाॅ० शिवकुमार चौहान, वी०वी० गुरूकुल कांगडी हरिद्वार

(रजत चौहान) हरिद्वार। दुनिया भर मे कोरोना का आतंक दिन प्रतिदिन अपने चरम की ओर बढ रहा है। अमीर-गरीब, मजदूर-किसान, युवा-वृद्व सभी इस महामारी के प्रकोप के दंश को प्रतिदिन झेल रहे है। जीवन की गति ओर लक्ष्य का ध्यान तो दूर आज कल दिन-रात बस जीवन की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने की चिंता लगी रहती है। मानो जीवन नीरस एवं उत्साहहीन हो गया हो, न कोई उत्सव, न कोई तैयारी, सबको बस है एक ही चिंता, दूर कब होगी यह महामारी। लेकिन एक विचारनीय प्रश्न है कि क्या लाॅक डाउन का पालन करके तथा सामाजिक दूरी बनाये रखकर ही इस महामारी को जीता जा सकता है, हमारी संस्कृति और सभ्यता जो युगों से वसुधैवकुटुम्बकमं का संदेश देती आ रही है। उस संस्कृति का क्या इस महामारी के साथ ही विलय हो जायेगा। हमारे त्योहार तथा उत्सव जो जीवन में ऊर्जा का संचार करते है, उनके प्रति हमारी रवैया क्या इसी प्रकार उदासीन होता रहेगा। इन सभी प्रश्नों पर विचार करने पर केवल एक ही समाधान नजर आता है कि हम सब मिलकर कमर कसें और सभी का सहयोग करके, सामाजिक सद्भाव एवं संवेदनाओं का आदर करते हुए जागरूक बनने का प्रयास करेंगें तभी इस महामारी को दूर भगाया जा सकता है।
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