हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। वरिष्ठ समाजसेवी कार्तिक कुमार की उपलब्धियां लगातार दूसरे भी शहरों में बढ़ती ही जा रही हैं। कार्तिक कुमार लगातार कोरोना नामक बीमारी से लड़ने वाले हर व्यक्ति का हौसला बढ़ाने के लिए लगातार सम्मानित कर रहे हैं। कार्तिक कुमार ने अपने उत्कृष्ट और सामाजिक कार्यों के बल पर अपनी अलग ही पहचान बनाई है। आज कार्तिक कुमार की टीम दिल्ली, मुंबई, सहारनपुर, देवबंद, ऋषिकेश, देहरादून व हरिद्वार सभी जगह पर सामाजिक कार्यों में तत्पर है, कार्तिक कुमार को गंगा रत्न अवॉर्ड और अलग-अलग शहरों में विभिन्न पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। राजनीति में देखा जाए तो मानव अधिकार संस्था द्वारा दिन-रात अपने कार्य में तत्पर रहते हैं। सनातन हिंदू वाहिनी सचिव का दायित्व अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार में चेयरमैन, गंगा महासभा मेंबर, आई०एच०बी०टी प्रोड्यूसर, ज़ी टीवी डीआईडी कोरियोग्राफर, मेंबर ऑफ गंगा महासभा, कार्तिक इवेंट सीईओ और भी काफी नाम से जाने जाते हैं। विभिन्न संस्थाओं में भी नाम निरंतर कार्यरत है। कार्तिक कुमार हरिद्वार के जगजीतपुर में रहते हैं। इनकी सोच बचपन से ही समाजिक कार्यों में निष्ठा भाव से कार्य करना और गरीबों का सदैव ध्यान देने की रही है। कार्तिक कुमार ने बताया कि लॉक डाउन में निचले स्तर के लोगों को बड़ी ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान गरीबों को राशन दिया जा रहा है। लेकिन राशन में चावल, गेहूं व तेल देकर एक गरीब अपना पूरा गुजारा नहीं कर सकता। क्योंकि 1 साल से 3 साल तक बच्चों को दूध की आवश्यकता होती है। गरीब घर के व्यक्ति को मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है। पैसा ना होने के कारण वह व्यक्ति अपने बच्चे की पूरी खान पीन का ध्यान नहीं रख पा रहें हैं। जिसके कारण काफी बच्चों में कमजोरी या बड़ी बीमारी का शिकार होना पड़ सकता हैं। कार्तिक कुमार की टीम द्वारा हर शहर में खाना वितरित किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि राशन के साथ कुछ पैसा गरीबों को दान के तौर पर दिया जाए। जिससे निचले स्तर के कमाने वाले लोगो को 300 रुपये की दिहाड़ी का 50 प्रतिशत भी अगर मिल जाए तो वह व्यक्ति अपने बच्चे की परवरिश में कुछ सुधार ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमारा देश करोना नामक बीमारी से एक ही महीने की दुर्दशा देखते हुए 6 महीने पीछे जा चुका है। और आगे आने वाले दो महा अगर लॉक डाउन रहा तो कठिनाइयां और भी बढ़ेंगे। साथ ही साथ भारत खुलने पर यह देश 1 साल पीछे जा चुका होगा। मध्यमा के परिवार के पास पैसा ना होना और दाल, चीनी, दही, दूध, फल इन सब में तेजी से वृद्धि होना आर्थिक तंगी को स्पष्ट दर्शाता है। अगर सरकार इस पर गौर नहीं देती है तो सरकार गरीबों की निराशा का सामना स्वयं ही करना पड़ेगा। अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वाले चुनाव में काफी मायूसी का सामना सरकार को करना पड़ सकता है।



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