हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। किसी भी शहर या ग्रामीण क्षेत्र में यदि अपराध पर नियंत्रण पाना हो तो सर्वप्रथम उसके लिये पुलिस प्रशासन को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाने होंगे, सी०सी०टी० वी० एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जिसकी मदद से पुलिस ने काफी केस हल करने में कामयाबी ली है, जब भी कही कोई आपराधिक घटना जैसे लूट, डकैती, चेन स्नेचिंग, हत्या हुई हो तो सर्वप्रथम पुलिस उस क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरे तलाशती है, लेकिन अन्य शहरों देहात से ज्यादा हरिद्वार में पिछले काफी समय से सड़कों पर ऐसे दो पहिया वाहन आसानी से दिख जायेगे, जिनके पीछे नम्बर प्लेट किसी की स्टाईलिस होगी, 
तो किसी के नम्बर सी०सी०टी०वी० में पढ़ने योग्य ही नही तो कई वाहनों में तो पीछे नम्बर प्लेट ही नही मिलती, इनके चालक जहाँ पुलिसकर्मी खड़े होते है, वहाँ से रास्ता बदल लेते है, या फिर पुलिस के आगे कुछ पल के लिये हेलमेट पहन लेते है, ताकि पुलिस हेलमेट के कारण उन्हें न रोके, ऐसा भी देखा गया है, कि काफी पुलिसकर्मी जब तक कोई बड़ा आदेश न आये तब तक हेलमेट के अलावा रुचि लेना नही चाहती है, समाज की सुरक्षा में यह काफी बड़ी चूक है, इससे पहले कि किसी दिन इसका जनता को भारी खामियाजा भुगतना पड़े पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त कार्यवाही करते हुवे,
शहर और गाँव मे से संदिग्ध नम्बर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ एक मुहिम छेड़नी होगी, संदिग्ध नम्बर प्लेट पाये जाने पर 100 रुपये के चालान काटने से मामला रफा दफा करने की अपेक्षा कम से कम 500 रुपये से जुर्माना करके उसकी खबर मीडिया से शेयर करनी होगी ताकि जनता को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सके, साथ ही जिन सरकारी नम्बर प्लेट के नम्बरो पर रंग उतर गया उन्हें चाहिए कि वो पेंटर की मदद से उसे पढ़ने योग्य बनवाये, लेकिन शहर के नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी तरह की कोई कोताही नही बरतनी चाहिए।
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