हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी के रूप में मनाया गया। इस पर्व को मनाने वाले लोग भगवान विष्णु के प्रतीक आंवला पेड़ की पूजा करते हैं और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। अक्षय नवमी की पूजा आवंले के पेड़ से जुड़ी होने के कारण इस आंवला नवमी भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। उत्तर भारत के कई इलाकों में आज के दिन लोग सबसे अच्छा और अपना पसंदीदा पकवान बनाकर आवंले के पेड़ के नीचे रखते हैं और पूजा के बाद सपरिवार आंवले के नीचे प्रसाद ग्रहण करते हैं। आवंले में बहुत सी बीमारियों से लड़ने की ताकत होती है। यहां तक कहा जाता है कि आंवले को अमृत्व प्राप्त है और आंवले के नीचे भोजन करने से बीमारियों से छुटकारा मिलता है शरीर स्वस्थ रहता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग अक्षय नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन करते हैं उन पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूर्ण करती हैं। कहा जाता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है, लेकिन अक्षय नवमी के दिन इसमें सभी देवी देवता विराजते हैं। यानी अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के पूजन से सभी देवी देवताओं की पूजा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। धर्म रक्षा मिशन ने सामूहिक रूप से पूजन किया व सामूहिक भोज किया। इस कार्यक्रम मे अध्यक्ष आचार्य नितिन शुक्ला, केशव तनेजा, अंकित शर्मा, यज्ञदत्त चक्रपाणि, अनुज खैरवाल, अंकित अग्रवाल, राजकुमार प्रधान, शिवम शर्मा, अनुज त्रिपाठी, दीपरत्न शर्मा ,मनोज ठाकुर, शैलेष गुप्ता, सर्वेश खैरवाल, विनीत पाराशर व ललित आदि ने कार्यक्रम मे भाग लिया।



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