हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। बकरा मीट का कार्य करने वाले उपनगरी ज्वालापुर के गरीब बेरोजगार ने शासन प्रशासन से मांग की है, कि पूर्व की भाति बकरा मीट का कार्य करने की अनुमति के लिए शासन प्रशासन को जिसमे महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, माननीय मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय नैनीताल, जिला अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट, जिला खादय सुरक्षा विभाग, नगर आयुक्त नगर निगम को पत्र भेजा जिसमे बताया कि उनका बकरा भेड मीट का पुश्तैनी कारोबार वर्ष-1941 से करते चले आ रहे है, उक्त कारोबार पीढी दर पीढी चला रहा है, जिसके साक्ष्य परमिट/लाईसंस उनके पास वर्ष-1941 से लेकर वर्तमान तक मौजूद है, जो कि स्थानीय निकाय/स्थानीय थाने आदि के द्वारा समय समय पर प्रार्थीगण को उपलब्ध कराये जाते रहे है, स्थानीय निकाय द्वारा वर्ष-1972 मे बकरा भेड मीट की दुकाने मौहल्ला कैथवाडा ज्वालापुर मे नियमानुसार आवंटित कर दी थी, जिसके बाद आवंटित दुकानों मे उनके पूर्वजों द्वारा बकरा भेड मीट का कारोबार शुरू कर दिया गया था, तथा वर्ष-2010 मे स्थानीय निकाय द्वारा बोर्ड मे प्रस्ताव पारित कर स्थानीय निकाय की सराय स्थित भूमि मे मीट कारोबारियो को 500/- प्रतिमाह पर दुकाने आवंटित की गई थी, जो वर्तमान तक केवल कागजो मे सीमित रही, तथा वर्ष-2016 मे भी स्थानीय निकाय द्वारा मीट की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव बोर्ड मे पारित किया गया था, जिसे स्थानीय निकाय द्वारा कागजो मे सीमित रखा गया, वर्ष-1916 हरिद्वार नगर पालिका के बायलॉज मे बकरा भेड के मीट व कटान पर कोई पाबंदी नही है, जबकि जनहित याचिका गौरी मौलेखी बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य मे दिनाँक 19/12/2011 को माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा पारित आदेश मे राज्य व अन्य को तीन वर्षो के अंदर अंदर उचित संख्या मे स्लाटर हाउस बनाने की व्यवस्था करने के आदेश दिये थे, वर्तमान तक माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा अमल नही किया गया, जनहित याचिका परवेज आलम बनाम राज्य व अन्य को दिनाँक 15/12/2018 के आदेश मे भी माननीय उच्च न्यायालय की डबल बैंच द्वारा राज्य व अन्य को अनुच्छेद 21 के तहत रोजी रोटी की व्यवस्था करने का मौलिक अधिकार है, जिससे वंचित नही किया जा सकता है, ऐसी टिप्पणी माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त जनहित याचिका के आदेश मे की गई है, जबकि वर्तमान मे जिला प्रशासन द्वारा यकायक मीट का कार्य बंद करवा दिया गया, जिस कारण मीट विक्रेता बेरोजगार हो गये, तथा उनके परिवार पर भूखे मरने का खतरा मंडराने लगा है, एवं उनके बच्चो की शिक्षा भी बेरोजगारी के कारण अवरुद्ध हो रही है, वर्ष-2018 मे तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा कहा गया था कि हर निकाय क्षेत्र मे स्लाटर हाउस बनाये जायेगे, मीट विक्रेताओ ने शासन प्रशासन पर आरोप लगाया कि समय पर स्लाटर हाउस ना बनाना शासन प्रशासन की लापरवाही है, जिसका खामियाजा मीट विक्रेताओं व अन्य झेलने को मजबूर है, तथा मीट विक्रेताओ के परिवारों व अन्य को समस्याओं का सामना करना पड रहा है, मीट विक्रेताओ द्वारा उक्त विभागो को लिखे गये पत्र मे मांग की गई कि बकरा मीट को पूर्व की भाति जब तक व्यवस्था की जाये संचालित करने की अनुमति प्रदान की जाये ताकि बेरोजगार हुए मीट विक्रेताओं को रोजगार मिल सके, यह बाते मीट विक्रेताओ ने हरिद्वार की गूंज से कही।



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