हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। दीपावली त्यौहार सकुशल सम्पन्न कराने हेतु हाल ही में कप्तान द्वारा पुलिस के आला अधिकारियों के संग बैठक की गई थी। उसके परिणामस्वरूप शहर में मुख्य जगहों पर पुलिस भी देखी गयी, मगर शहर की सुरक्षा को देखते हुवे लगता हैं कि हमारे जनपद के पुलिस कप्तान अपने विभाग में एक दिशा निर्देश करना भूल गए। इस बात को देखते हुवे कि शहर में तैनात पुलिस अधिकारी या होमगार्ड सिर्फ खड़े होकर ड्यूटी देने के अलावा आते जाते संदिग्धों पर तेज तर्रार निगाह भी रखे। क्योकि हरिद्वार पुलिस के अधिकारी ही नही अपितु होमगार्ड और पीआरडी के जवानो की भी आँखे इतनी तेज तर्रार हैं कि वो चेहरा और हाव भाव देखकर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान कर लेते है। बस ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यकता होती हैं कि समय समय पर उनके शीर्ष अधिकारी उनका मनोबल बढ़ाते रहे। हरिद्वार या किसी भी जनपद में उत्तर प्रदेश के सीतापुर में कमलेश तिवारी की हत्या जैसी घटना को रोकने हेतु आवश्यक हैं कि हेलमेट या सीट बेल्ट की मानसिकता से बाहर निकलकर आते जाते सभी वाहन चालक या व्यक्तियों पर तेज तर्रार निगाह रखी जाए। शक होने पर चेतक, सीपीयू आदि के साथ तालमेल मिलाकर उसकी घेराबन्दी की जाय। सुरक्षा में कितनी बड़ी चूक हैं कि पुलिस विभाग संदिग्ध नम्बर प्लेट पर पहले तो गम्भीर नही फिर यदि दिन में कोई पकड़ा भी जाए तो मामूली जुर्माना करके मामला वही रफा दफा कर दिया जाता हैं। कैसे कोई दिल्ली वाली नम्बर प्लेट कार ब्लैक शीशे लगे हुवी दिल्ली से हरिद्वार तक पहुँच गयी। सुरक्षा में चूक होने पर अपराधियो के हौसले बुलंद होते है। माना कि उत्तराखंड पुलिस के काबिल अफसरों और कर्मचारियों के कारण 90 प्रतिशत आपराधिक घटनाओं को सुलझाने में कामयाबी ली हैं। लेकिन बेहतर हो कि शहर या गांव में बनी चेक पोस्ट या चोर रास्ते से जाने वाले आपराधिक विचारधारा रखने वाले अप्रिये घटना को अंजाम देने से पहले ही धर लिये जाय। ये तभी होगा जब हरिद्वार पुलिस हेलमेट सीट बेल्ट के अलावा अपनी तेज तर्रार निगाह से आने जाने वालों को फिल्टर करती रहे। उसके लिये ड्यूटी समय फेसबुक और वट्सअप से भी दूरी बनानी पड़ेगी।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours