हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने नागकेशर के पौधा का पूजन कर पर्यावरण दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत की। 


संस्था की अधिष्ठात्री ने नागकेशर के पौधा का किया पूजन

पश्चात् व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र, श्री वीरेश्वर उपाध्याय, डॉ. ओपी शर्मा आदि वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने शांतिकुंज परिसर में नागकेशर, सीता अशोक, मौलश्री आदि के पौधे रोपे। यूं तो देश एवं विदेश में स्थित करोड़ों गायत्री परिजनों को साथ लेकर शांतिकुंज परिवार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण अभियान चला रहा है। जल संरक्षण एवं शुद्धि के लिये भागीरथी जलाभिषेक अभियान है, तो वहीं पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षगंगा अभियान।  


शांतिकुंज में पर्यावरण दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम

शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ व रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्वयक श्री केदार प्रसाद दुबे के नेतृत्व में एक दल शहर के गंगा सभा, सेवाभारती, वरिष्ठ नागरिक मंच, गंगा महोत्सव समिति के अध्यक्ष जगदीश पाहवा, प्रेस क्लब सहित 59 विभिन्न संगठनों, गैर सरकारी संस्थानों, पत्रकारों को पौधे एवं वृक्ष गंगा साहित्य भेंट किया। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का वृक्षगंगा अभियान एक अनूठा अभियान है। यह सिर्फ पौधे लगाने का अभियान मात्र नहीं है वरन् पर्यावरण के हितैषी वृक्ष लगाना एवं उनका पूरा संरक्षण इसकी विशेषता है। इसमें जन-जन की भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की जन्म शताब्दी वर्ष 2011 से प्रारंभ होकर अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा पौधे रोपे जा चुके हैं और यह क्रम आगे भी निरंतर जारी रहेगा। गायत्री परिवार प्रमुख ने कहा कि वायु प्रदूषण से कई प्रकार की बीमारियाँ जैसे-शारीरिक परिवर्तन से लेकर श्वास व हृदय की रोग बढ़ रहे हैं। वायु प्रदूषण से बचने का सर्वमान्य उपाय है वृक्षारोपण। वृक्षारोपण से शारीरिक, मानसिक से लेकर आर्थिक लाभ भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पर्यावरण मित्र संस्कृति है। जिसमें पाँचों तत्त्वों तथा पेड़ों, नदियों को देवरूप में माना गया है। वेदों से लेकर समस्त आर्ष ग्रंथों में पर्यावरण के संरक्षण को पुनीत धर्म, कर्त्तव्य माना गया है। मौसम विभाग, नई दिल्ली के उपनिदेशक आनंद शर्मा ने कहा कि पौधे लगाने के लिए केवल किसी संस्थान विशेष पर आश्रित नहीं रहना चाहिए, वरन् इस दिशा में व्यक्तिगत, संगठन व सरकारी स्तर पर भी सामूहिक रूप से आगे आना चाहिए। विगत कुछ वर्षों में इस दिशा में गायत्री परिवार ने एक सार्थक पहल किया, सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आज जल, वायु सहित अनेक संकट विकराल रूप में दिखाई दे रहा है। इसका मूल है कारण पृथ्वी में हरीतिमा की कमी। श्री शर्मा ने कहा कि पौधों में एक खास किस्म की प्रक्रिया होती है, जो लाइट एनर्जी को केमीकल एनर्जी में बदल देती है, जो सम्पूर्ण जीव के आवश्यक है। जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित व सर्वोदयी नेता पर्यावरणविद् श्री धूमसिंह नेगी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन आज एक वैश्विक चुनौती बनते जा रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग व युवाओं को आगे आना होगा। इस अवसर पर पर्यावरणविदों ने जल, जंगल व जमीन को बचाने का आह्वान भी किया। शांतिकुंज स्थित उद्यान विभाग के प्रभारी पर्यावरणविद सुधीर भारद्वाज ने कहा कि पर्यावरण दिवस के दिन पौधे लगाने का कार्य केवल औपचारिक रूप से नहीं होना चाहिए, वरन् उसके  क्रिया पक्ष को वैज्ञानिक तरीके से सामने रखकर पौधे लगाने चाहिए। उद्यान विभाग ने शांतिकुंज आने वाले दर्शनार्थियों को भी सीता अशोक, तुलसी, रुद्राक्ष, अशोक मौलश्री आदि कई तरह के पौधे निःशुल्क वितरित किये।
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