हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री परिवार शांतिकुंज ने शांतप्रिय व विनम्रता के धनी स्व. प्रकाश पंत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि राज्य के विकास में सतत कर्मयोगी की तरह कार्य करने वाले स्व. पंत न केवल उत्तराखण्ड के विकास के लिए समर्पित प्रमुख हस्तियों में से एक थे, वरन् वे गायत्री परिवार के साथ भी जुड़े थे। देवात्मा हिमालय के निकट बसा पिथौरागढ़ के मुन्स्यारी में शांतिकुंज द्वारा निर्मित गायत्री साधना केन्द्र को बनाने में भी स्व. पंत जी का अतुलनीय सहयोग रहा। वे कई बार इस साधना केन्द्र में आये और ध्यान, साधना भी किया। उन्होंने कहा कि अपने सौम्य स्वभाव से सबके दिल जीत लेने वाले स्व. पंत जी कई बार शांतिकुंज, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय भी आये। वे जब भी यहाँ आते, उत्तराखण्ड के युवाओं के विकास की चर्चा होती। शांत व सरल स्वभाव के धनी स्व. पंत जी पहाड़ के लोगों के पलायन से लेकर उनके रोजगार के लिए चिंता करते थे। शांतिकुंज द्वारा संचालित देहरादून जिले के उत्पाल्टा तथा पिथौरागढ़ के मुन्स्यारी में चल रहे स्वावलंबन केन्द्र की भाँति राज्य के स्थान-स्थान पर इसी तरह के केन्द्र बनाने की सपना संजोये थे। जहाँ महिलाएँ कुछ काम सीखकर अपने परिवार के जीवकोपार्जन में सहयोग कर सकें। वे हमेशा मुझे बड़े भाई की तरह मानते रहे। उनका मात्र ५९ वर्ष की आयु असमय जाने से न केवल उत्तराखण्ड ने एक हीरा खो दिया, वरन् गायत्री परिवार ने भी एक सच्चा स्वयंसेवक खो दिया है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में शांतिकुंज उनके परिवार के साथ है।
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