हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। एक ओर जहाँ इंसान पैसो के लालच में एक दूसरे को धोखा देने, बेईमानी करने में भी पीछे नही हटता तो वही दूसरी ओर आई.आर.बी. द्वितीय हरिद्वार की "डी" कंपनी में नियुक्त आरक्षी नौशाद अली ने उस समय ईमानदारी की मिसाल पेश की जब वह अपने एटीएम से पैसे निकालने पी.ए.सी गेट के बाहर लगे हिताची कंपनी के ए.टी.एम. में गया तो वहां नौशाद अली ने जैसे ही जैसे ही प्रवेश किया तो पाया कि ए.टी.एम.में पहले से ही किसी के 5000 रुपये निकले हुए पाए तो सिपाही ने अपने पैसे निकालने के बाद पहले से निकले पैसे वापस बैरिक में आकर सूबेदार सैन्य सहायक जयकृत भंडारी को दिए। नौसाद ने उन्हें घटना की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने पूर्व से निकले 5000 रुपयों के संबंध में हिताची कंपनी के नम्बर पर फोन किया गया, किन्तु कंपनी में फोन नही उठाया। उसके पश्चात इस संबंध में थाना रानीपुर में संपर्क किया गया है। ताकि पूर्व में निकले 5000 रुपये संबंधित व्यक्ति तक पहुच सके। सेनानायक श्री अरुण मोहन जोशी ने सिपाही को इस ईमानदारी के लिए पुरस्कार की घोषणा की है। ईमानदारी सर्वोत्तम नीति को नौसाद ने सिद्ध किया।



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