हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। क्या कहते है ब्राहमण सभा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक पढ़िए, समाचार पत्रो व इलेक्ट्रोनिक मिडिया के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि केन्द्र सरकार भारत में निवास करने वाले मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मदरसो जिनमें मात्र इस्लाम धर्म की ही शिक्षा ही दी जा रही है, के अत्यधिक सर्वधन हेतु भारतीय संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करते हुये नागरिको के आयकर से प्राप्त धन का दुरूपयोग करते हुये राष्ट्र के अन्य समुदाय की अवहेलना करते हुये केवल मुस्लिमो के लिए 100 मदरसे और खोले जाने एवं पूर्व से चले आ रहे मदरसो को भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता किये जाने का प्रावधान करने की घोषणा की है, जो कि देश में रह रहे अन्य धर्मो एवं समुदाय के अधिकारो का उल्लघंन है। उन्हें ऐसी योजनाओ से पूर्णतः वंचित किया जा रहा है जबकि यदि कोई योजना अथवा आर्थिक सहायता की भी थी मानी थी तो वह सभी धर्मो एवं समुदाय के धार्मिक विद्यालयो के गठन एवं उनके सर्वधन के लिए समान रूप से की जानी चाहिए थी। जिसके अन्तर्गत यदि इस समय देश में 20 करोड मुस्लिम है तो उनके लिए आपके द्वारा 100 अलग मदरसे बनाये जाने का प्राविधान किया गया है, ऐसे ही 100 करोड हिन्दू आबादी के लिए 500 हिन्दू धार्मिक गुरूकुलो का निर्माण साथ में किये जाने की घोषणा होती तथा इसके अलावा देश में जो वास्तव में अल्पसंख्यक है अर्थात् सिक्ख, जैन, बौद्ध, पारसी, इत्यादि के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में उनकी धार्मिक शिक्षण संस्थान बनाये जाने का भी प्राविधान साथ में किये जाने की घोषणा होती तो यह भारतीय संविधान में सभी नागरिको को प्रदत्त समानता के अधिकारो सम्बन्धित अनुच्छेद में की गयी व्यवस्था का भी वास्तव में पालन होता।
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यह कि आपके द्वारा एक धर्म विशेष के लिए इतने बडे स्तर पर उनके धार्मिक संस्थानो को बनवाये जाने का प्रस्ताव एवं पूर्व से लाखो की संख्या में अनाधिकृत रूप से चल रहे मदरसो को अप्रत्याशित रूप से आर्थिक सहायता प्रदान करना संविधान में वर्णित समानता के अधिकारो का पूर्णतः उल्लघंन है।
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यह कि आपकी उपेक्षा एवं गलत योजनाओ के कारण पूर्व से संचालित सरकारी स्कूल एवं विद्यालय केन्द्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा छात्रो की कम संख्या दर्शित करते हुये लगातार बंद किये जा रहे है। जबकि जो स्कूल एवं विद्यालय वर्तमान में संचालित है उनमें भी पर्याप्त अध्यापक संख्या आपके द्वारा उपलब्ध नहीं करायी गयी है तथा अधिकतर सरकारी विद्यालय में विशेषकर प्राथमिक विद्यालय में 5 कक्षा होने के बावजूद एक-एक अथवा दो-दो अध्यापक संख्या द्वारा ही विद्यालय का संचालन हो रहा है जिससे शैक्षिक उन्वयन का होना यर्थात् में संभव ही नहीं है। चूंकि प्रत्येक विद्यालय एवं स्कूल में जितनी कक्षा होती है कम से कम उतने अध्यापको का होना तथा अधिक छात्रो की संख्या होनी भी अवस्था में अनुपातिक रूप से अध्यापको का होना अधिक आवश्यक है। परन्तु आपसे सम्बन्धित प्रदेश सरकारो द्वारा प्राईवेट स्कूलो को अनावश्यक बढावा देने व अंवाछित लाभ कमाने की गरज से जानबूझकर सरकारी स्कूल एवं विद्यालयो का सर्वधन तथा उनका नव निर्माण तथा उसमें प्रर्याप्त अध्यापक संख्या जानबूझकर नहीं बढाया जा रहा है। जबकि उक्त स्कूलो एवं विद्यालय में संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकारो के अन्तर्गत सभी धर्मो के बच्चो को समान रूप से बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्रदान की जा रही है।
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यह कि यदि आपके द्वारा 100 मदरसो के नव निर्माण के बजाये अथवा केवल मुस्लिमो की शिक्षा के सर्वधन के बजाये समान रूप से सभी के लिए 1000 नये मॉर्डन स्तर के स्कूलो के निर्माण सम्बन्धि घोषणा कर उनका निर्माण कर सर्वधन किया जाता तथा सभी देश के निम्न स्तर के सरकारी स्कूलो को कुछ सुदृढ करने हेतु करोडो रूपयो आर्थिक सहायता की घोषणा होती तो सरकार का ऐसा कदम संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार के अन्तर्गत होता तथा सभी के द्वारा उनका सम्मान किया जाता। परन्तु आपकी एकतरफा/मोनोपॉली जैसी पॉलिसी से की गयी उक्त घोषणा से देश का हिन्दू समाज एवं वास्तविक अल्पसंख्यक सिख, जैन, बौद्ध, पारसी आदि अपने को छला हुआ महसूस कर रहे है। अतः आपको इस नोटिस द्वारा हिदायत दी जाती है कि आप नोटिस प्राप्ति के 60 दिन के अन्दर-अन्दर आपके द्वारा उक्त असंवैधानिक प्रस्ताव व घोषणा एवं योजना को तुरन्त वापस लेना, देश के सभी धर्मो के लिए समान शैक्षिक उन्वयन की व्यवस्था देश के छात्रो हेतु घोषित कर अपने द्वारा पूर्व में की गयी असंवैधानिक रूप से 100 नये मदरसो के सर्जन एवं पुराने मदरसो को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को वापस लेकर खेद प्रकट करें। यदि आप ऐसा नहीं करते है तो मेरे व्यवहारी संस्था आपके विरूद्ध सक्षम न्यायालय में संविधान की गरिमा एवं अनुप्रष्ठता बनाये रखने हेतु जनहित में याचिका दायर करायेगी जिसमें होने वाले समस्त हर्जे खर्चे की जिम्मेंदारी आपकी होगी। नोटिस हाजा पाक व साफ हैं। कटिंग पर मेरे लघु हस्ताक्षर है नोटिस की एक प्रति मेरे कार्यालय पर सुरक्षित है, एक प्रति आपको प्रेषित की जा रही है।




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