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(संजय राजपूत) मेरठ। शामली उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फटकार के बाद भी शामली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली सुधरने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को एक बार फिर एक ऐसी शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें फोन करने के बावजूद घंटों तक 108 एंबुलेंस के नहीं आने पर गरीब व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी की रेहड़े में लेकर तीन किमी दूर अस्पताल पहुंचा तो वहां स्टाफ ने टरकाना शुरू कर दिया, बाद में जैसे-तैसे भर्ती किया, लेकिन फिर हायर सेंटर रेफर कर दिया। उधर, सीएमओ का कहना है कि 108 एंबुलेंस को कोई फोन नहीं किया गया। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी। शामली के पंसारियान मोहल्ले नई बस्ती की रहने वाली 35 वर्षीय महिला अंजु विकलांग है और पिछले कई दिनों से बीमार चल रही है। शुक्रवार दोपहर करीब 11 बजे उसकी हालत ज्यादा खराब हुई तो रेहड़े चलाने वाले पति पप्पू ने उसे सरकारी अस्पताल ले जाने के लिये 108 एम्बुलेंस को फोन किया। पप्पू का आरोप है कि फोन करने के बावजूद तीन घंटे तक उसके घर एम्बुलेंस नहीं पहुंची। इंतजार के बाद उसने अपना रेहड़ा निकाला और पत्नी को उसमें लेकर हनुमान चौक स्थित सीएचसी के लिये रवाना हो गया। भरी दोपहरी में करीब तीन किलोमीटर तक रेहड़ा खींचकर वह अस्पताल तो पहुंच गया, मगर वहां से भी उसे डॉक्टरों ने टरकाना शुरू कर दिया। बाद में मीडिया के पहुंचने पर महिला को पहले तो इमरजेंसी में भर्ती किया और कुछ देर बाद ही उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। सीएमओ संजय भटनागर ने बताया कि वह दिनभर मीटिंग में व्यस्त थे। मीडिया के जरिये ही इस घटना की जानकारी हुई है। जांच करने पर पता चला कि पीड़ित की ओर से 108 एम्बुलेंस को कोई कॉल नहीं की गई है। सीएचसी पहुंचने पर महिला को तुरंत उपचार दिलाया गया और उसकी हालत को देखते हुए रेफर किया गया है। फिर भी कोई मामले की जांच कराई जाएगी।

रास्तेभर मां को पंखा झलता रहा मासूम

रेहड़े में बीमार पत्नी को अस्पताल ले जाते वक्त पप्पू ने अपने मासूम बेटे को भी साथ ले लिया था। मासूम रास्तेभर अपनी मां को गर्मी से निजात दिलाने के लिये पंखा झलता रहा है और मां का पसीना पौछता रहा। 

दो दिन पहले ही प्रमुख सचिव ने किया था सीएचसी का निरीक्षण

दो दिन पहले ही जिले के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव कृषि विभाग अमित मोहन प्रसाद ने शामली सीएचसी का निरीक्षण किया था और निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा था कि अस्पताल में सब सुविधाएं हैं और सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। डॉक्टर भी सही तरीके से अपना काम कर रहे हैं, जबकि दूसरी उनके सामने ही मरीजों ने नाराजगी जताई थी। दो दिन पहले ही प्रमुख सचिव का जिला अस्पताल का निरीक्षण करना और इसके फौरन बाद ही ऐसी तस्वीर सामने आना अपने आप में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक सवालिया निशान जरूर खड़ा करता है।

एक महीने पहले शामली के जाम ने ले ली थी युवती की जान

करीब एक महीने पहले आग में झुलसी एक युवती को जाम के बीच से स्ट्रेचर पर ले जाते हुए एक वीडियो सामने आया था, जिससे हड़कंप मच गया था, बाद में युवती की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों अधिकारियों की बैठक में इस घटना का हवाला देते हुए साफ चेताया था कि ऐसी घटना पूरे प्रदेश में कहीं पर भी नहीं दोहराई जानी चाहिये। इसके बाद 108 एंबुलेंस की सेवा और पीएचसी पर कर्मचारियों का टरकाने वाला रवैया सवालिया निशान लगा रहा है। एक महीने पहले भी एक युवती आग से गंभीर रूप से झुलस गई थी। जब उसे अस्पताल लाया जा रहा था तो नगर के अंदर गन्ने के वाहनों की वजह से लगे भीषण जाम में आग में झुलसी हुई एक युवती फंस गई थी। इतना ही नहीं युवती की सहायता के लिए हॉस्पिटल से आने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंस कर रह गयी है। जिसके बाद लगभग आधा किलो मीटर दूर से ज़ाम में फंसी युवती को स्ट्रेचर पर जाम के बीच से लाते हुए हॉस्पिटल ले जाया गया।
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