हरिद्वार की गूंज (24*7)
(निक्की शर्मा आजाद) स्वतंत्र लेखक हरिद्वार। समाज और देश का विकसित देश न बनने का कारण राजनीति और जातिवाद भी रहा है। वोट बैंक की राजनीति औऱ विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा प्रत्येक जाति के वोट को अपनी ओर आकर्षित करने के चक्कर मे अलग अलग दांवपेंच इस्तेमाल करना रहा है। वर्तमान में जातिवाद और राजनीति एक फैशन बन गया है, जातिवाद का सबसै बड़ा श्रेय हमारे देश की राजनीति को ही जाता है। वोट बैंक के चक्कर मे राजनीति में अंधे नेता जैसै कहे वैसै जनता को भड़का देती है और हम भड़क जाते हैं, हुतेरी की, धत्त तेरी की करने पर उतर आते है। कहते हैं कि जो लोग समय के अनुसार नही बदलते उन्हें जमाना बदल देता है। अतः वक्त बदल रहा है हमें भी बदलना होगा। हमे स्मरण होना चाहिए कि सनातन धर्म से प्राचीन धर्म कोई नही। जिसके अवशेष समय समय पर मिलते रहते है। हमारे लिये कितने गर्व की बात है कि एक मुस्लिम देश इंडोनेशिया जो कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद वहाँ रामायण को भारत देश से कहि ज्यादा सम्मान दिया जाता है। वहाँ की हवाई सेवा का नाम गरुड़ है। आज आस्ट्रेलिया, अमेरिका और सऊदी अरब, सनातन धर्म को अपने भारत से कहि ज्यादा महत्त्व दे रहे है बल्कि अपना भी रहे हैं। देश मे विभिन्न राजनीति दल जातिवाद के चलते उनके वोट बैंक पाने के लिये जगह जगह सार्वजनिक स्थलों पर मूर्ति लगवाते हैं। यह भी देखा गया है कि कुछ असमाजिक तत्व वोट बैंक के लिए उन मूर्ति के अंग भंग करके माहौल खराब करते हैं। जिसके कारण कई बार जिंदगी भी दांव पर लग जाती है। इराक में जब सद्दाम हुसैन का बोल बाला था उसने देश का मोटा धन खर्च करके खुद की मूर्तिया इसलिए बनवाई ताकि वो विश्व मे खुद को सबसे बड़ा साबित कर सके। बस यही होड़ आज अपने देश मे शुरू हो गयी हैं। सम्मान देने की बात है तो देश के लिये जो सैनिक बॉर्डर पर देश की रक्षा करते करते शहीद हो जाते हैं, उनकी भी देश के प्रमुख स्थलो पर उनकी मूर्ति लगनी चाहिए, उनके नाम पर कॉलेज हो, स्टेशनों के ना हो। लेकिन जातिवाद को बढ़ावा देने हेतु जगह जगह मूर्ति लगवाना न्यायोचित नही।
आखिर क्यों जब किसी क्षेत्र में किसी एक जाति के लोग कम और अन्य किसी जाति के लोग ज्यादा परिवार हो तो कम वाले को दबाने का उसे तरह तरह से नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता है।
मत भूलो यदि देश को आजाद कराने से पहले भी लोग जातिवाद मूर्तिवाद में बंटे होते तो आज भी यह देश गुलाम ही होता। देश के बॉर्डर पर सैनिक किसी जातिवाद आदि की मानसिकता से पीड़ित नही होता उसके लिए देश की रक्षा करने के अलावा कोई अन्य राजनिति दिमाक में नही होती है। अम्बेडकर जी ने देश को संविधान दिया तो महाराणा प्रताप ने मुगलो से देश की रक्षा की, तो अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद ने देश के लिये अपना जीवन समर्पित किया। देश प्रेम से बढ़कर कुछ कभी हो भी नही सकता। उसी तरह समाज और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने हेतु देश के युवाओं को चाहिए कि वो जातिवाद, धर्मवाद मूर्तिवाद से बाहर निकलकर सिर्फ और सिर्फ देश और मानवता के हित पर ही ध्यान केंद्रित करें।
(निक्की शर्मा आजाद) स्वतंत्र लेखक हरिद्वार। समाज और देश का विकसित देश न बनने का कारण राजनीति और जातिवाद भी रहा है। वोट बैंक की राजनीति औऱ विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा प्रत्येक जाति के वोट को अपनी ओर आकर्षित करने के चक्कर मे अलग अलग दांवपेंच इस्तेमाल करना रहा है। वर्तमान में जातिवाद और राजनीति एक फैशन बन गया है, जातिवाद का सबसै बड़ा श्रेय हमारे देश की राजनीति को ही जाता है। वोट बैंक के चक्कर मे राजनीति में अंधे नेता जैसै कहे वैसै जनता को भड़का देती है और हम भड़क जाते हैं, हुतेरी की, धत्त तेरी की करने पर उतर आते है। कहते हैं कि जो लोग समय के अनुसार नही बदलते उन्हें जमाना बदल देता है। अतः वक्त बदल रहा है हमें भी बदलना होगा। हमे स्मरण होना चाहिए कि सनातन धर्म से प्राचीन धर्म कोई नही। जिसके अवशेष समय समय पर मिलते रहते है। हमारे लिये कितने गर्व की बात है कि एक मुस्लिम देश इंडोनेशिया जो कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद वहाँ रामायण को भारत देश से कहि ज्यादा सम्मान दिया जाता है। वहाँ की हवाई सेवा का नाम गरुड़ है। आज आस्ट्रेलिया, अमेरिका और सऊदी अरब, सनातन धर्म को अपने भारत से कहि ज्यादा महत्त्व दे रहे है बल्कि अपना भी रहे हैं। देश मे विभिन्न राजनीति दल जातिवाद के चलते उनके वोट बैंक पाने के लिये जगह जगह सार्वजनिक स्थलों पर मूर्ति लगवाते हैं। यह भी देखा गया है कि कुछ असमाजिक तत्व वोट बैंक के लिए उन मूर्ति के अंग भंग करके माहौल खराब करते हैं। जिसके कारण कई बार जिंदगी भी दांव पर लग जाती है। इराक में जब सद्दाम हुसैन का बोल बाला था उसने देश का मोटा धन खर्च करके खुद की मूर्तिया इसलिए बनवाई ताकि वो विश्व मे खुद को सबसे बड़ा साबित कर सके। बस यही होड़ आज अपने देश मे शुरू हो गयी हैं। सम्मान देने की बात है तो देश के लिये जो सैनिक बॉर्डर पर देश की रक्षा करते करते शहीद हो जाते हैं, उनकी भी देश के प्रमुख स्थलो पर उनकी मूर्ति लगनी चाहिए, उनके नाम पर कॉलेज हो, स्टेशनों के ना हो। लेकिन जातिवाद को बढ़ावा देने हेतु जगह जगह मूर्ति लगवाना न्यायोचित नही।
आखिर क्यों जब किसी क्षेत्र में किसी एक जाति के लोग कम और अन्य किसी जाति के लोग ज्यादा परिवार हो तो कम वाले को दबाने का उसे तरह तरह से नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता है।
मत भूलो यदि देश को आजाद कराने से पहले भी लोग जातिवाद मूर्तिवाद में बंटे होते तो आज भी यह देश गुलाम ही होता। देश के बॉर्डर पर सैनिक किसी जातिवाद आदि की मानसिकता से पीड़ित नही होता उसके लिए देश की रक्षा करने के अलावा कोई अन्य राजनिति दिमाक में नही होती है। अम्बेडकर जी ने देश को संविधान दिया तो महाराणा प्रताप ने मुगलो से देश की रक्षा की, तो अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद ने देश के लिये अपना जीवन समर्पित किया। देश प्रेम से बढ़कर कुछ कभी हो भी नही सकता। उसी तरह समाज और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने हेतु देश के युवाओं को चाहिए कि वो जातिवाद, धर्मवाद मूर्तिवाद से बाहर निकलकर सिर्फ और सिर्फ देश और मानवता के हित पर ही ध्यान केंद्रित करें।



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