हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। भारतवर्ष में सदा से नारी सम्मान का पात्र रही है और उसे साक्षात शक्ति का स्वरूप माना जाता है. माँ भगवती द्वारा महिषासुर, शुम्भ निशुम्भ, रक्तबीज जैसे दानवों का संहार इसी बात का प्रमाण हैं. मधु कैटभ का वध भी भगवान श्री विष्णु ने माँ शक्ति का आश्रय लेकर ही किया था. वास्तव में समस्त प्रकृति नारी का स्वरूप है, जो अपने रहस्यमय तथा विस्मित करने वाले अस्तित्व से पल पल इसी बात का अहसास कराती है, कि नारी शक्ति का स्वरूप है, स्नेह का स्वरूप है, ज्ञान का स्वरूप है तथा लक्ष्मी का स्वरूप है. उसकी इन समस्त शक्तियों को नकारने की नहीं, अपितु उनके सामने श्रद्धापूर्वक नतमस्तक होने की तथा प्रेमपूर्वक अपने हृदय में स्थान देने की आवश्यकता है. नवरात्रों में माँ भवानी की उपासना, प्रमाण है कि नारी के साथ, शक्ति के साथ, प्रकृति के साथ, सम्मान और प्रेम का व्यवहार किया जाएगा, उन्हें कोई भी कष्ट नहीं होगा, तो सबका कल्याण इसी में निहित है।
(रजत चौहान) हरिद्वार। भारतवर्ष में सदा से नारी सम्मान का पात्र रही है और उसे साक्षात शक्ति का स्वरूप माना जाता है. माँ भगवती द्वारा महिषासुर, शुम्भ निशुम्भ, रक्तबीज जैसे दानवों का संहार इसी बात का प्रमाण हैं. मधु कैटभ का वध भी भगवान श्री विष्णु ने माँ शक्ति का आश्रय लेकर ही किया था. वास्तव में समस्त प्रकृति नारी का स्वरूप है, जो अपने रहस्यमय तथा विस्मित करने वाले अस्तित्व से पल पल इसी बात का अहसास कराती है, कि नारी शक्ति का स्वरूप है, स्नेह का स्वरूप है, ज्ञान का स्वरूप है तथा लक्ष्मी का स्वरूप है. उसकी इन समस्त शक्तियों को नकारने की नहीं, अपितु उनके सामने श्रद्धापूर्वक नतमस्तक होने की तथा प्रेमपूर्वक अपने हृदय में स्थान देने की आवश्यकता है. नवरात्रों में माँ भवानी की उपासना, प्रमाण है कि नारी के साथ, शक्ति के साथ, प्रकृति के साथ, सम्मान और प्रेम का व्यवहार किया जाएगा, उन्हें कोई भी कष्ट नहीं होगा, तो सबका कल्याण इसी में निहित है।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours