हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। पौराणिक कथा के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा अपने बच्चों, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश के साथ अपने मायके यानी धरती आती हैं, मायके आई लड़की यानी दुर्गा मां को बढ़िया भोजन, नए कपड़े और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है. दुर्गा मां को भोग लगाए बिना यह उत्सव अधूरा रहता है. खिचड़ी, चटनी और खीर देवी मां के प्रिय भोजन हैं, मां दुर्गा को किस दिन किस चीज का भोग लगाएं? नवरात्र के नौ दिनों में देवी मां को नौ अलग-अलग पदार्थ चढ़ाए जाने का विधान है।
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शैलपुत्री - पहले दिन मां शैलपुत्री को कुट्टू यानी कि शैलअन्न का भोग लगाया जाता है।
ब्रह्मचारिण - दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दही का भोग लगाएं।
चंद्रघंटा - तीसरे दिन मां चंद्रघंटा पर चौलाई यानी रामदाना का भोग लगाएं।
कूष्माण्डा - चौथे दिन दिन मां कूष्माण्डा को पेठे का भोग चढ़ाएं।
स्कन्दमाता - पांचवें दिन मां स्कन्दमाता को जौ-बाजरे का भोग लगाएं।
कात्यायनी - छठे दिन मां कात्यायनी को लौकी का भोग लगाएं।
कालरात्रि - सातवें दिन मां कालरात्रि को काली मिर्च और कृष्ण तुलसी या काले चने का भोग लगाएं।
महागौरी - अष्टमी के दिन मां महागौरी को साबूदाना अर्पित करें।
सिद्धिदात्री - नवमी पर मां सिद्धिदात्री को आंवले का भोग लगाएं।
(रजत चौहान) हरिद्वार। पौराणिक कथा के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा अपने बच्चों, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश के साथ अपने मायके यानी धरती आती हैं, मायके आई लड़की यानी दुर्गा मां को बढ़िया भोजन, नए कपड़े और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है. दुर्गा मां को भोग लगाए बिना यह उत्सव अधूरा रहता है. खिचड़ी, चटनी और खीर देवी मां के प्रिय भोजन हैं, मां दुर्गा को किस दिन किस चीज का भोग लगाएं? नवरात्र के नौ दिनों में देवी मां को नौ अलग-अलग पदार्थ चढ़ाए जाने का विधान है।
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शैलपुत्री - पहले दिन मां शैलपुत्री को कुट्टू यानी कि शैलअन्न का भोग लगाया जाता है।
ब्रह्मचारिण - दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दही का भोग लगाएं।
चंद्रघंटा - तीसरे दिन मां चंद्रघंटा पर चौलाई यानी रामदाना का भोग लगाएं।
कूष्माण्डा - चौथे दिन दिन मां कूष्माण्डा को पेठे का भोग चढ़ाएं।
स्कन्दमाता - पांचवें दिन मां स्कन्दमाता को जौ-बाजरे का भोग लगाएं।
कात्यायनी - छठे दिन मां कात्यायनी को लौकी का भोग लगाएं।
कालरात्रि - सातवें दिन मां कालरात्रि को काली मिर्च और कृष्ण तुलसी या काले चने का भोग लगाएं।
महागौरी - अष्टमी के दिन मां महागौरी को साबूदाना अर्पित करें।
सिद्धिदात्री - नवमी पर मां सिद्धिदात्री को आंवले का भोग लगाएं।



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