हरिद्वार की गूंज
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। हरिद्वार धर्म नगरी को ज्वालापुर से जोड़ने वाला रेलवे ऊंचे पुल का निर्माण लगभग 4 महीने पहले हो गया था। इस पुल से दिन रात लाखों की संख्या में लोग सफर करते हैं। आपको बता दें कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण यह ऊंचा पुल किसी बड़ी दुर्घटना को दावत दे रहा है। आये दिन लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल से यात्रा कर रहे हैं। शाम ढलते ही रात का अंधकार पुल को पूरी तरह अपने आगोश में ले लेता है। नजर ही नहीं आता, कि यहां पुल है या नहीं, पुल पर नगर निगम द्वारा बिजली के खंबे तो लगा दिये गये हैं। लेकिन खंभों पर आज तक लाईट नहीं लगाई गई है। इतना ही नहीं पुल पर दिशा निर्देश तथा चेतावनी बताने वाला कोई भी चिन्ह या बोड तक नहीं लगाया गया है,
यह प्रशासन की लापरवाही नहीं तो ओर क्या है, कि रात के अंधेरे में लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर ऊंचे पुल से सफर कर रहे हैं, प्रशासन की लापरवाही से किसी मासूम की जान तथा किसी के घर का इकलोता चिराग बुझ सकता है।
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। हरिद्वार धर्म नगरी को ज्वालापुर से जोड़ने वाला रेलवे ऊंचे पुल का निर्माण लगभग 4 महीने पहले हो गया था। इस पुल से दिन रात लाखों की संख्या में लोग सफर करते हैं। आपको बता दें कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण यह ऊंचा पुल किसी बड़ी दुर्घटना को दावत दे रहा है। आये दिन लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल से यात्रा कर रहे हैं। शाम ढलते ही रात का अंधकार पुल को पूरी तरह अपने आगोश में ले लेता है। नजर ही नहीं आता, कि यहां पुल है या नहीं, पुल पर नगर निगम द्वारा बिजली के खंबे तो लगा दिये गये हैं। लेकिन खंभों पर आज तक लाईट नहीं लगाई गई है। इतना ही नहीं पुल पर दिशा निर्देश तथा चेतावनी बताने वाला कोई भी चिन्ह या बोड तक नहीं लगाया गया है,
यह प्रशासन की लापरवाही नहीं तो ओर क्या है, कि रात के अंधेरे में लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर ऊंचे पुल से सफर कर रहे हैं, प्रशासन की लापरवाही से किसी मासूम की जान तथा किसी के घर का इकलोता चिराग बुझ सकता है।



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