हरिद्वार की गूंज
(बलकित सिंह) हरिद्वार। ज्वालापुर आर्य नगर चौक पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया है। अचानक मलबे से भरी ट्रैक्टर ट्राली सड़क के अंदर धस्ती चली गई। घटना लगभग
कल शाम
7:30 बजे की है। इस घटना में जान माल की हानि की सूचना तो नहीं है। लेकिन सरकार और विभागीय अधिकारियों के विकास करने की कार्यशैली पर निशान चिन्ह छोड़ गया है। विभागीय अधिकारी कागजों में ही करोड़ों रुपए के कार्य दिखा कर सड़कों को काला पोती कर देते है। टैक्स के नाम पर आम जनता से लिया जा धन ठिकाने लगाने मे जहां विभागीय अधिकारी कम नहीं। वहीं सरकार भी कम दोषी नहीं है। सरकारी विभागों में विकास कार्यों के लिए कमिशन का खेल आम आदमी के लिए हमेशा से परेशानी का सबब बना है। कमीशन के खेल के चलते विकास कार्यों के लिए मिला भारी-भरकम बजट भी नाकाफी नजर आता है। कमीशन के चलते ठेकेदार भी मानक के स्वरूप सड़क में अच्छी लागत का कार्य नहीं कर पाते है। कमीशन के खेल को देख कर विधायक हो या मंत्री अपनी आंखें बंद कर लेता है। क्योंकि विधायक, मंत्रियों का भी करोड़ों की लागत के कार्य में हिस्सा होता है। विकास कार्य करने के ढोल पीटने वाली सरकार हवा मे ही अपने तीर छोड़ती रहती है। जिसका खामियाजा भोली भाली आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। आपको बता दें कि जिले में खस्ताहाल सड़कों से आए दिन भारी-भरकम दुर्घटनाएं हो रही हैं। कोई ना कोई यात्री सड़कों के गड्ढों में गिरकर अपनी जान गवा रहा है। हाल ही में सड़क हादसे में 2 लोगों की जान जा चुकी हैं। सिडकुल में भी खस्ताहाल सड़कों से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। वहीं सड़क हादसे में खुद रुड़की के भाजपा नेता जान गवा चुके हैं। सरकार किसका इंतजार कर रही है। जबकि केंद्र में और राज्य में भी भाजपा की सरकार है। रात दिन खस्ताहाल सड़कों पर गुजरने वाले खुद शहरी विकास मंत्री हरिद्वार के होने पर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनका एक ही मिशन नजर आ रहा है। गैस सिलेंडर बांटना और मस्त रहना। सरकार को विभागों से कमिशन का खेल खत्म करना होगा। जिससे ठेकेदार अच्छी लागत से सड़कों का निर्माण कर सके और जनता सड़क हादसे में शिकार ना हो सके।
(बलकित सिंह) हरिद्वार। ज्वालापुर आर्य नगर चौक पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया है। अचानक मलबे से भरी ट्रैक्टर ट्राली सड़क के अंदर धस्ती चली गई। घटना लगभग
कल शाम
7:30 बजे की है। इस घटना में जान माल की हानि की सूचना तो नहीं है। लेकिन सरकार और विभागीय अधिकारियों के विकास करने की कार्यशैली पर निशान चिन्ह छोड़ गया है। विभागीय अधिकारी कागजों में ही करोड़ों रुपए के कार्य दिखा कर सड़कों को काला पोती कर देते है। टैक्स के नाम पर आम जनता से लिया जा धन ठिकाने लगाने मे जहां विभागीय अधिकारी कम नहीं। वहीं सरकार भी कम दोषी नहीं है। सरकारी विभागों में विकास कार्यों के लिए कमिशन का खेल आम आदमी के लिए हमेशा से परेशानी का सबब बना है। कमीशन के खेल के चलते विकास कार्यों के लिए मिला भारी-भरकम बजट भी नाकाफी नजर आता है। कमीशन के चलते ठेकेदार भी मानक के स्वरूप सड़क में अच्छी लागत का कार्य नहीं कर पाते है। कमीशन के खेल को देख कर विधायक हो या मंत्री अपनी आंखें बंद कर लेता है। क्योंकि विधायक, मंत्रियों का भी करोड़ों की लागत के कार्य में हिस्सा होता है। विकास कार्य करने के ढोल पीटने वाली सरकार हवा मे ही अपने तीर छोड़ती रहती है। जिसका खामियाजा भोली भाली आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। आपको बता दें कि जिले में खस्ताहाल सड़कों से आए दिन भारी-भरकम दुर्घटनाएं हो रही हैं। कोई ना कोई यात्री सड़कों के गड्ढों में गिरकर अपनी जान गवा रहा है। हाल ही में सड़क हादसे में 2 लोगों की जान जा चुकी हैं। सिडकुल में भी खस्ताहाल सड़कों से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। वहीं सड़क हादसे में खुद रुड़की के भाजपा नेता जान गवा चुके हैं। सरकार किसका इंतजार कर रही है। जबकि केंद्र में और राज्य में भी भाजपा की सरकार है। रात दिन खस्ताहाल सड़कों पर गुजरने वाले खुद शहरी विकास मंत्री हरिद्वार के होने पर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनका एक ही मिशन नजर आ रहा है। गैस सिलेंडर बांटना और मस्त रहना। सरकार को विभागों से कमिशन का खेल खत्म करना होगा। जिससे ठेकेदार अच्छी लागत से सड़कों का निर्माण कर सके और जनता सड़क हादसे में शिकार ना हो सके।



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