हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा उत्तराखंड प्रभारी) हरिद्वार। यातायात पुलिस अक्सर अभिभावको को सचेत करते रहते है कि नाबालिग बच्चों को जीवन दे बाइक/ स्कूटी नही। अक्सर अधिकांश अभिभावक बच्चों के प्यार में आकर उन्हें कम उम्र में ही वाहन लेकर दे देते है। इस उम्र में विपरीत सेक्स की ओर आकर्षित होना उनसे दोस्ती करना फैशन से हो गया है। फिर अपनी दोस्त को वाहन पर बैठा कर ट्यूशन / स्कूल के बहाने चीला, पेंटागन मॉल घूमने निकल जाते है। ऐसा भी देखा गया है कि इस उम्र में सर के बाल खराब होने, बाल उड़ने की अफवाहों के चलते हेलमेट या तो हाथ मे टांग लेते है या डिक्की में । सिर्फ़ पुलिस के चालान से बचने के लिए ही हेलमेट रखते है। जीवन कितना अनमोल है ये बात बच्चों को ही नही अपितु उनके अभिभावक कोई अनहोनी दुर्घटना के होने पर ही समझते है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। बेहतर हो पुलिस ही नही अभिभावक भी सख्ती करे कि नाबालिग बच्चों को वाहन देने से बचे। बच्चों से बेहतर कुछ नही हो सकता। जो अभिभावक अपने कम उम्र के बेटों को बाइक और बेटियो को एंड्रॉयड मोबाइल दिलाते देते है, उनको एक दिन रोना भी पड़ता है।
(गगन शर्मा उत्तराखंड प्रभारी) हरिद्वार। यातायात पुलिस अक्सर अभिभावको को सचेत करते रहते है कि नाबालिग बच्चों को जीवन दे बाइक/ स्कूटी नही। अक्सर अधिकांश अभिभावक बच्चों के प्यार में आकर उन्हें कम उम्र में ही वाहन लेकर दे देते है। इस उम्र में विपरीत सेक्स की ओर आकर्षित होना उनसे दोस्ती करना फैशन से हो गया है। फिर अपनी दोस्त को वाहन पर बैठा कर ट्यूशन / स्कूल के बहाने चीला, पेंटागन मॉल घूमने निकल जाते है। ऐसा भी देखा गया है कि इस उम्र में सर के बाल खराब होने, बाल उड़ने की अफवाहों के चलते हेलमेट या तो हाथ मे टांग लेते है या डिक्की में । सिर्फ़ पुलिस के चालान से बचने के लिए ही हेलमेट रखते है। जीवन कितना अनमोल है ये बात बच्चों को ही नही अपितु उनके अभिभावक कोई अनहोनी दुर्घटना के होने पर ही समझते है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। बेहतर हो पुलिस ही नही अभिभावक भी सख्ती करे कि नाबालिग बच्चों को वाहन देने से बचे। बच्चों से बेहतर कुछ नही हो सकता। जो अभिभावक अपने कम उम्र के बेटों को बाइक और बेटियो को एंड्रॉयड मोबाइल दिलाते देते है, उनको एक दिन रोना भी पड़ता है।



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