हरिद्वार की गूंज
(अब्दुल सत्तार-वरिष्ठ सम्पादक) हरिद्वार। नगर निगम हरिद्वार के चुनाव की तैयारी चुनाव आयोग की तरफ से लगभग सभी तैयारी पूरी हो चुकी है, इसी कडी मे मेयर और पार्षद पद के लिए प्रत्याशियो ने भी अपनी कमर कस रखी है, लेकिन चुनाव लडने को सब तैयार है,लेकिन कोई बताऐगा कि चुनाव लडने वाले प्रत्याशी विकास की कितनी बात कर रहे है, और किस प्रकार से जनसमुदाय की समस्याओं का निस्तारण करने की कसमें खा रहे है, कमाल है, अरे प्रत्याशी तुम्हारे से पहले वाले जीतने वालो ने कुछ विकास किया हुआ होगा जो तुम कर रहे होंगे, एक बात बिल्कुल साफ है, वो ये है, कि चुनाव लडने वाले लोग वोट हासिल करने से पहले कितने ही वादे इरादे कर ले कि हम जनता की समस्याओं का निदान करेंगे, लेकिन जीत हासिल करने वाले ज्यादातर प्रत्याशी उस जनता को दरकिनार कर देगें जिस जनता के आगे चुनाव के समय हाथ जोडकर आशीर्वाद मांग रहे थे, तो इस प्रकार के लोगो को चुनने से पहले समाज के सभी वर्गो को सोच समझकर अकल मंदी के साथ अपना प्रतिनिधि चुनना चाहिए, लेकिन देश भारत की एक विडम्बना रही है, वो ये है, कि हमारे देश के लोग भ्रमित जल्द से जल्द हो जाते है, खास अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाली सबसे बडा वर्ग है, यदि इस समुदाय मे कोई समझदार पढा लिखा व्यक्ति अपने समाज के लोगो की कुछ पैरवी कर रहा तो अल्पसंख्यक समुदाय के अनपढ गवार लोगो से अल्पसंख्यक मुस्लिम चिल्लर नेता कहते है, कि वो दिन दो अक्षर क्दारा पढ लिया अपने आप को बडा नेता समझ बैठा है, इन बेचारे मुस्लिम चिल्लर नेताओ की भी क्या गलती बेचारो पर काम तो है, भोले भाले अनपढ मुस्लमानो को डर दिखा दिखाकर पुलिस के और दूसरे सरकारी विभागो से काम निकलवाने के बदले बीच मे दलाली खाकर अपना चुल्हा सीधा करते है, मै किसी और के मौहल्ले की बात नही कर रहा हूँ, मै अपने मौहल्ले की ही बात करता हूँ,हमारे यहाँ अनपढो की तादाद लगभग 90 प्रतिशत है, और नेता गीरी के नाम पर दलाली करने वाले और मुस्लमानो के हितैषी कहने वाला हमारे मौहल्ले मे एक भी नेता ग्रेजुएट की तो बात ही छोडो हाईस्कूल, इण्टर भी नही है, जो जनप्रतिनिधि जीत कर आये है, उनको अपने अधिकारो का ही नही पता है, कि जनता तथा समाज के प्रति हमारा क्या दायित्व बनता है, आज भी लोगो को यदि राशनकार्ड आदि की जरूरत आती है, तो मुस्लमान उसी रास्ते पर खडा है, यानि वोट देने के बाद अपना प्रत्याशी जीतने के बाद भी दलालो और दलाली करने वाले चिल्लर नेताओ को काम के बदले पैसा देने को मजबूर है, तो कहाँ है, विकास कौन सा प्रतिनिधि विकास कर रहा है, तो इस प्रकार ऐसे प्रतिनिधि चुनने से कुछ नही हो सकता है, समाज को अपने अन्दर खासकर मुस्लमानो को सुधार और बदलाव लाना पडेगा वरना ये मुस्लिम दलाल नेता आपके वोट का सौदा करते रहेगा तथा अपना उल्लू सीधा करते रहेगे, और विकास केवल इन मुस्लिम चिल्लर नेताओ और दलालो के मुँह ही मुँह पर रहेगा, इसके अलावा कुछ भी नही हो सकता है, जागो समाज जागो समाज ,यदि आप नही जागोगे तो ये लोग आपके काम से दलाली और अपना काम निकालते रहेगे, तो अपना प्रतिनिधि सोच समझ और परख कर चूनो, और खास तौर से ध्यान रखो कि जिनके बडे आज तक आप पर राजनीति करते आ रहे है, उनके बडो से आपके और आपकी नस्लों को कुछ नही मिला तो उनके छोटे जो आपके प्रतिनिधि बनने का ख्वाब देख रहे है, उनसे आपको क्या मिलेगा। खुदा ने आपको सोचने के लिए अक्ल दी है,
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