हरिद्वार की गूंज
(रजत चौहान प्रधान सम्पादक) हरिद्वार।
कभी खुशी, कभी गम, कभी थकान तो कभी आराम, पीने वाले शराब पीने का मौका खोज ही लेते हैं. पीते ही इंसान का मूड बदल सा जाता है, कुछ लोग ज्यादा बात करने लगते हैं. आखिर शराब हमारे शरीर के भीतर क्या करती है.शैंपेन की घूंट मुंह में जाते ही दिमाग और शरीर पर बेहद अलग असर होने लगता है. मुंह में जाते ही शैंपेन को कफ झिल्ली सोख लेती है. घूंट के साथ बाकी शराब सीधे छोटी आंत में जाती है. छोटी आंत भी इसे सोखती है, फिर यह रक्त संचार तंत्र के जरिए लीवर तक पहुंचती है.हाइडेलबर्ग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर हेल्मुट जाइत्स के मुताबिक, "लीवर पहला मुख्य स्टेशन है. इसमें ऐसे एन्जाइम होते हैं जो अल्कोहल को तोड़ सकते हैं." यकृत यानी लीवर हमारे शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर करता है. अल्कोहल भी हानिकारक तत्वों में आता है. लेकिन यकृत में पहली बार पहुंचा अल्कोहल पूरी तरह टूटता नहीं है. कुछ अल्कोहल अन्य अंगों तक पहुंच ही जाता है.जाइत्स कहते हैं, "यह पित्त, कफ और हड्डियां तक पहुंच जाता है, यहां पहुंचने वाला अल्कोहल कई बदलाव लाता है." अल्कोहल कई अंगों पर बुरा असर डाल सकता है या फिर 200 से ज्यादा बीमारियां पैदा कर सकता है.बहुत ज्यादा अल्कोहल मस्तिष्क पर असर डालता है. आस पास के माहौल को भांपने में शरीर गड़बड़ाने लगता है, फैसला करने की और एकाग्र होने की क्षमता कमजोर होने लगती है. शर्मीलापन कमजोर पड़ने लगता है और इंसान खुद को झंझट मुक्त सा समझने लगता है.लेकिन ज्यादा मात्रा में शराब पीने से ये अनुभव बहुत शक्तिशाली हो जाते हैं और इंसान बेसुध होने लगता है. उसमें निराशा का भाव और गुस्सा बढ़ने लगता है. और यहीं मुश्किल शुरू होती है. 2012 में दुनिया भर में शराब पीने के बाद हुई हिंसा या दुर्घटना में 33 लाख लोगों की मौत हुई, यानी हर 10 सेकेंड में एक मौत.अल्कोहल को मस्तिष्क तक पहुंचने में छह मिनट लगते हैं. जाइत्स इस विज्ञान को समझाते हैं, "एथेनॉल अल्कोहल का बहुत ही छोटा अणु है. यह खून में घुल जाता है, पानी में घुल जाता है. इंसान के शरीर में 70 से 80 फीसदी पानी होता है. इसमें घुलकर अल्कोहल पूरे शरीर में फैल जाता है और मस्तिष्क तक पहुंच जाता है.सिर में पहुंचने के बाद अल्कोहल दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटरों पर असर डालता है. इसकी वजह से तंत्रिका तंत्र का केंद्र प्रभावित होता है. अल्कोहल की वजह से न्यूरोट्रांसमीटर अजीब से संदेश भेजने लगते हैं और तंत्रिका तंत्र भ्रमित होने लगता है.कभी कभी इसका असर बेहद घातक हो सकता है. कई सालों तक बहुत ज्यादा शराब पीने वाले इंसान के शरीर में जानलेवा परिस्थितियां बनने लगती हैं, "ऐसा होने पर विटामिन और जरूरी तत्वों की आपूर्ति गड़बड़ाने लगती है, इनका केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में अहम योगदान होता है." उदाहरण के लिए दिमाग को विटामिन बी1 की जरूरत होती है. लंबे समय तक बहुत ज्यादा शराब पीने से विटामिन बी1 नहीं मिलता और वेर्निके-कोर्साकॉफ सिंड्रोम पनपने लगता है, "दिमाग में अल्कोहल के असर से डिमेंशिया की बीमारी पैदा होने का खतरा बढ़ने लगता है.मुंह और गले में अल्कोहल कफ झिल्ली को प्रभावित करता है, भोजन नलिका पर असर डालता है. लंबे वक्त तक ऐसा होता रहे तो शरीर हानिकारक तत्वों से खुद को नहीं बचा पाता है. इसके दूरगामी असर होते हैं. जाइत्स के मुताबिक पित्त संक्रमण का शिकार हो सकता है, "हम अक्सर भूल जाते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर और आंत के कैंसर के लिए अल्कोहल भी जिम्मेदार है." लीवर में अल्कोहल के पचते ही हानिकारक तत्व बनते हैं, जो लीवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. जर्मनी में हर साल करीब 20 से 30 हजार लोग लीवर सिर्होसिस से मरते हैं.जाइत्स चेतावनी देते हुए कहते हैं, "लीवर में अल्कोहल के पचते ही लोग सोचते हैं कि जहर खत्म हो गया लेकिन ये आनुवांशिक बीमारियां भी पैदा कर सकता है."


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