हरिद्वार की गूंज (24*7)

(नीटू कुमार) हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद  छात्रावास का लोकार्पण पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक तथा संस्कृत शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडेय ने संयुक्त रूप से ऑनलाइन माध्यम से किया। हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि संस्कृत शिक्षा में  अध्ययन के आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा संस्कृत भाषा के प्रति उनका लगाव बाल्यकाल से ही रहा है,वह आजीवन संस्कृत के प्रति समर्पित रहे हैं,पूरे विश्व का मार्गदर्शन करने वाली संस्कृत भाषा के लिए नई शिक्षा नीति में अनेक प्रावधान किए गए हैं,नई शिक्षा नीति भारत के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली है।निशंक ने कहा कि उत्तराखंड की पावन धरा पर ही संस्कृत वांग्मय की रचना हुई,यह भूमि ऋषियों महर्षियों की तपस्थली है,हम सौभाग्यशाली हैं कि हम सभी का जन्म ऐसी पवित्र  धरा पर हुआ है। संस्कृत शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि  प्रदेश सरकार संस्कृत शिक्षा के संवर्धन तथा प्रगति के लिए कटिबद्ध है। प्रदेश भर में संस्कृत के आवासीय विद्यालय खोलने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा संस्कृत पूर्णतः वैज्ञानिक भाषा है ,दुनिया का ज्ञान विज्ञान संस्कृत में ही समाहित है।इस विश्वविद्यालय के छात्र मानव कल्याण की दृष्टि से विश्व स्तर का अनुसंधान करने में सफल होंगे ऐसा मेरा विश्वास है। विशिष्ट अतिथि स्थानीय विधायक आदेश चौहान ने कहा कि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर स्वामी विवेकानंद छात्रावास का लोकार्पण होने पर वह प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं,इस 126 बेड के छात्रावास के तैयार होने से संस्कृत के छात्रों को अब भटकना नहीं पड़ेगा,वह परिसर में रहकर अपनी शिक्षा की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होने कहा हरिद्वार शिक्षा का हब बन चुका है,इस बात के लिए मुझे गर्व है कि संस्कृत विश्वविद्यालय मेरी विधानसभा के भीतर है। विधायक ने हर सम्भव मदद का आश्वासन विश्वविद्यालय के अधिकारियों को दिया। संस्कृत शिक्षा सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा सरकार संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सदैव प्रयत्नशील है, यह छात्रावास भी उसी दिशा में किये गए प्रयत्न का हिस्सा है।सचिव ने विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता जाहिर की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा विश्वविद्यालय के छात्रों की आवश्यकताओं को देखते हुए स्वामी विवेकानंद छात्रावास का निर्माण बहुत तेजी से किया गया है, इससे दूर दराज से आने वाले छात्रों को आवास तथा भोजन की समस्या नहीं होगी वह अच्छे से अपना ध्यान शिक्षा पर केंद्रित कर पाएंगे। कुलपति ने राज्य सरकार तथा संस्कृत शिक्षा सचिव का छात्रावास निर्माण में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कुलपति ने कहा कि संस्कृत का छात्र हृदय से सरल और मन से कोमल होता है। उन्होंने कहा कि जब डॉ निशंक ने संस्कृत को द्वितीय राजभाषा बनाया तो लोग आश्चर्य में पड़ गए कि संस्कृत भी द्वितीय राजभाषा बन सकती है, डॉ निशंक के ही कार्यकाल में देशभर में तीन संस्कृत विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।उन्हीं के समय में राष्ट्र के लिए नई शिक्षा नीति का बनना भी शिक्षा के लिए आमूलचूल परिवर्तन है। स्वागत भाषण  में गिरीश कुमार अवस्थी ने विश्वविद्यालय की प्रगति के बिंदुओं पर सभी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन डीन अकादमिक डॉ शैलेश कुमार तिवारी तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव ने किया।इससे पूर्व वैदिक विधि विधान से लोकार्पण समारोह का शुभारंभ डॉ अरुण कुमार मिश्र ने मंगलाचरण से किया। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि ओम प्रकाश जमदग्नि, हिमालयन विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ राजेश नैथानी, संस्कृत भारती के प्रदेश संगठन मंत्री योगेश विद्यार्थी, अभाविप के  विभाग संगठन मंत्री अरुण राही, वरिष्ठ प्रोफेसर मोहन बलोदी, प्रोफेसर दिनेश चमोला, आयुर्वेद विश्वविद्यालय के डॉ प्रेम चंद शास्त्री सहित संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य, सह आचार्य, सहायक आचार्य, सह पुस्तकालयाध्यक्ष, शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित थे।

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