हरिद्वार की गूंज (24*7)
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आइये एक नजर डालते हैं:-
गतवर्ष की अपेक्षा इस बार भारत देश मे कोरोना के कारण ज्यादा मृत्यु हो रही हैं इसके बारे ने रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने हरिद्वार की गूंज के पत्रकार गगन शर्मा से कई महत्वपूर्ण बातें शेयर की।
उन्होंने बताया कि पहली बात हिंदुस्तान मे खतरों के खिलाड़ी कुछ ज्यादा ही है। कम पढ़े लिखो की बात छोड़ दो पढ़ें लिखे लोग भी अनपढों वाले काम करने से नही चूक रहे हैं। समाज के एक बुद्धिजीवी ने अपने परिजन की कोरोना में हालत इस तरह से खराब कर दी कि जब उसे पहले दिन बुखार हुवा तो उसे पहले दिन से लेकर 4 दिन तक पैरासिटामोल देता रहा। उसने उसका कोविड 19 का टेस्ट कराना भी आवश्यक नही समझा। जब बात ज्यादा बढ़ गयी तब उसने हॉस्पिटल, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर बैड के लिये फोन खड़खड़ाने शुरू किये। आदेश चौहान ने बताया कि कुछ आसान से दिशा निर्देशों का यदि जनता पालन करे तो भारत देश और विभिन्न राज्यो और जनपदों के अस्पतालों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर के लिये आपाधापी नही रहेगी।
वो सामान्य निर्देश, सर्वप्रथम कोविड 19 की गाइडलाइंस का ईमानदारी से पालन हो। न कि मंत्रियों, विधायको आदि से फोन करवाकर शासन से अनावश्यक पास बनवाकर शादी, और फालतू के कामो से घूमना। लॉक डाउन में कर्फ्यू का पालन हो।
यदि अस्पताल, किराने की दुकान आदि पर जाना हो तो दूसरे को 2 गज की दूरी के लिये टोके, न कि बिना कुछ किये एक दूसरे पर चढ़े।
तीसरा घर मे प्रवेश से पूर्व जूते बाहर दूर निकाले। कपड़ो और भलीभांति स्वयं को सेनेटाइज्ड करे।
जब भी नम्बर आये तो अपने योग्य चिकित्सक से परामर्श के बाद वैक्सीन अवश्य लगवाये
उसके बावजूद यदि कभी शरीर में अकड़न, बुखार, खांसी, जुखाम आये, खाने में स्वाद, गन्ध न आने के लक्षण दिखे तो बिना शर्म, झिझक के अपना कोविड टेस्ट कराये।
उसकी रिपोर्ट आने तक स्वयं को परिवार के अन्य सदस्यो से अलग कर ले और योग्य चिकित्सक से सलाह लेकर दवाई ले। यदि आपकी रिपोर्ट पोजेटिव भी आती है तो आपके लिये घबराने की कोई बात इसलिए नही है क्योंकि आपने सही समय पर टेस्ट और आवश्यक उपचार शुरू कर दिया था। इसका उदाहरण है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जिनकी 90 वर्ष की आयु में भी वो कोरोना को हराकर स्वस्थ हुवे।
कोरोना बिगड़ने के कारण
बुखार आने पर अयोग्य चिकित्सक (जो कोविड टेस्ट के लिये न कहे) से दवा तो ले ली मगर अति आत्मविश्वास, डर, या पड़ोसी क्या कहेंगे आदि के कारण कोरोना टेस्ट कराने से बचने का प्रयास करते रहे। ऐसे व्यक्ति 4-5 दिन बाद जब इनको गले मे दर्द, सूंघने की, स्वाद की क्षमता नही रहती और ऑक्सीजन लेवल गिर जाता है फिर ऐसे लोगो का वो चिकित्सक कहता है कि आप इसे कही और दिखा लो। तब उसे हॉस्पिटल में बैड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। आजकल दिल्ली हो या कोई भी जनपद हर जगह अस्पतालों में बैड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की बहुत बड़ी समस्या है। जिसके कारण अस्पताल से कोरोना के रोगी स्वस्थ होकर लौटने की अपेक्षा असमय मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। इस प्रकार इस कोरोना से स्वयं और अपने परिजनों को बचाना केंद्र सरकार, राज्य सरकार और प्रशासन से कही ज्यादा आपके हाथ मे है।
इस विषय मे विधायक आदेश चौहान ने हरिद्वार जिलाधिकारी से कहा कि वो गांव गांव, शहर शहर गलियों में जो लोकल चिकित्सक बुखार आदि के मरीज देख रहे हैं उन तक आवश्यक निर्देश जारी कराये कि बुखार आदि का इलाज करने से पूर्व मरीज से कोविड टेस्ट कराने के लिये कहे। कोरोना को हराने और स्वयं को बचाने हेतु सरकारी दिशा निर्देशों का पालन इसलिए अनिवार्य है।



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