हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) हरिद्वार। कुंभ के शाही स्नान से एक दिन पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हरिद्वार पंहुचे और उन्होंने अपने हरिद्वार दौरे में केवल दो ही संतो से मुलाकात की। जिन दो बड़े संतो से अखिलेश यादव मिले वह दोनों ही संत भाजपा के धुर विरोधी खेमे के माने जाते है। अखिलेश यादव पहले शंकराचार्य स्वरूपानंद और उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिले और उन दोनों का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने शंकराचार्य के कुम्भ मेला शिविर में पूजा अनुश्ठान भी किया। यही नही अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वरूपानंद के मठ से केंद्र सरकार और पीएम मोदी की आलोचना की। अखिलेश यादव ने मोदी पर निशाना साधा की मोदी के पीएम रहते देश मे नफरत की रंजिश हो रही है, देश मे युवा रोजगार के लिए भटक रहे है, महगाई चरम पर पंहुच रही है, कोरोना को लेकर कोई तैयारी नही है, भाजपा के बड़े नेता कोरोना की चिंता छोड़ चुनाव के प्रचार में लगे हुए है। ऐसे में देश मे बदलाव की जरूरत है। कंही ऐसा तो नही कि शाही स्नान के एक दिन पहले अखिलेश यादव यंहा आकर केंद्र व यूपी सरकार की आलोचना कर कुंभ का माहौल बिगाड़ने चाहते है। सवाल उठ रहा है कि अपने चंद घंटों के दौरे में अखिलेश क्या राजनीति करते नही दिख रहे थे, वह यंहा पर केवल उन संतो से ही क्यों मिले जो भाजपा, मोदी योगी विरोधी माने जााते है। अखिलेश यादव स्वरूपंनद के बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी से मिलने निरंजनी अखाड़े भी पंहुचे। अखिलेश यादव निरंजनी अखाड़े में आइसोलेशन में पड़े महंत नरेंद्र गिरी से मिले। अखिलेश नरेंद्र गिरी के पास करीब आधा घंटे तक रहे। नरेंद्र गिरी को भी समाजवादी पार्टी का समर्थक माना जाता है।  सवाल यह भी उठ रहे है की अखिलेश का हरिद्वार आना और भाजपा और मोदी योगी विरोधियों से मिलकर उनकी आलोचना करना आखिर किस राजनीति का एजेंडा है। यही नही समाजवादी पार्टी हमेशा से ही तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और यही उन्होंने हरिद्वार के अपने इस दौरे में भी जारी रखी। 
अखिलेश हरिद्वार दौरे में केवल विरोधी संतो से तो मिले, और वह हरकी पौड़ी या किसी मंदिर में भी नही गए, मगर नरेंद्र गिरी से मिलने के बाद वह वंहा से सीधे प्रसिद्ध मुस्लिम तीर्थ स्थल पिरान कलियर जियारत करने पंहुचे। वंहा उन्होंने दरगाह पर चादर भी चढ़ाई। इससे साफ दिख रहा है कि अखिलेश ने अपने दौरे का इस्तेमाल मोदी योगी और भाजपा के खिलाफ किया। आश्चर्यजनक बात यह भी है कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आज सुबह से ही सेल्फ आइसोलेशन में है। नरेंद्र गिरी के कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद भी अखिलेश यादव उनसे न सिर्फ मिले बल्कि उनके पास करीब आधा घंटा रहे, बातचीत की और चाय भी पी। महंत नरेंद्र गिरी हमेशा से ही संघ समर्थित शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद का विरोध करते है। स्वरूपानंद भी वासुदेवानंद को शंकराचार्य नही मानते। यही नही उत्तराखंड की भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शुरू से ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के बजाय महामंत्री महंत हरिगिरि को ही तबज्जो देते रहे है। नरेंद्र गिरी शुरू से ही कुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार को घेरते रहे है और हमेशा सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते रहे है। इसके उलट त्रिवेंद्र को हटाकर भाजपा ने तीर्थ सिंह को मुख्यमंत्री बनाया तो तीरथ ने नरेंद्र गिरी को तबज्जो देनी शुरू कर दी और भाजपा व संघ समर्थित महंत हरिगिरि को लगभग दरकिनार किये रखा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद तीरथ सिंह रावत तीन बार हरिद्वार आ चुके है और तीनों बार वह महंत नरेंद्र गिरी के साथ गंगा पूजन सहित कई कार्यक्रमो में शामिल हुए और दो बार नरेंद्र गिरी के अखाड़े में भी गए। मगर मुख्यमंत्री एक बार भी हरिगिरि से अलग से न तो मिले और ना ही एक बार भी उनके अखाड़े में गए।

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