हरिद्वार की गूंज (24*7)

(नीटू कुमार) हरिद्वार। पेशवाई शब्द फारसी शब्द है और इसका अर्थ होता है कि अपनी सेना और परंपराओं के साथ नगर में निकलना। उसको पेशवाई कहा जाता है। जब पेशवाई किसी अखाड़े द्वारा निकाली जाती है, तो उसका कोई भी व्यक्ति अखाड़े में मौजूद नहीं होता है। पेशवाई के माध्यम से सभी साधु संतों का दर्शन नगर के लोग करते हैं भारत में हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में ही कुंभ मेले में पेशवाई निकाली जाती है. पेशवाई में अखाड़े अपने सभी हथियार और निशान के साथ पेशवाई निकालते हैं। यह सिर्फ कुंभ के अवसर पर ही निकाली जाती है। क्योंकि कुंभ में सभी अखाड़ों के साधु संत मौजूद होते हैं। इसलिए इस परंपरा को अनोखी परंपरा कहते है। कुंभ का पहला स्वरूप ही पेशवाई होता है। पेशवाई हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे के साथ निकाली जाती है। क्योंकि भारतीय परंपरा में इसको शुभ माना जाता है। वहीं भाजपा युवा नेता अनमोल कुमार के नेतृत्व में बूढ़ी माता मंदिर पर साधु संत का स्वागत किया गया और जल पान की व्यवस्था की गई। हिन्दू वाहिनी के नेता अर्पित अग्रवाल ने साधु संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर जय श्री राम उत्घोष किया। वही दूसरी ओर अनेक व्यापारी ने निम्बू पानी, फल, फूल मालाओं से अपने साधु संतों का भव्य स्वागत किया। हिन्दू व्यापारियो में कुँवर पाल अग्रवाल, रमन चौधरी, मोनू जोहारी, संजय शर्मा, नरेश धीमान, अनुज वालिया, अश्वनी मित्तल, राजेश वालिया, नरेश अग्रवाल, टीकम सिंह, सौरभ सारस्वत, निर्मल वसनीय आदि उपस्थित रहे।

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