हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं के आव्हान पर बामसेफ के आप सूट संगठन बहुजन क्रांति मोर्चा, राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ, बहुजन मुक्ति पार्टी, एंव चमार वाल्मीकि महासंघ के कार्यकर्ताओं के द्वारा किसान विरोधी कानून के विरोध में संयुक्त किसान-मजदूर मोर्चा के माध्यम से दिल्ली सभी बॉर्डरों पर किए जा रहे आंदोलन के समर्थन में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय हरिद्वार पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। और सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। किसान विरोधी कानून के विरोध में संयुक्त किसान मजदूर मोर्चा के माध्यम से दिल्ली सिंधु बॉर्डर, शाहजहां बॉर्डर एवं गाजीपुर बॉर्डर पर किसान विरोधी कानूनों को वापस कराए जाने के लिए आंदोलन चल रहा है। वहीं राष्ट्रीय किसान मोर्चा के प्रदेश संयोजक जबर सिंह ने कहा कि यह कानून पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पारित किए गए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 के माध्यम से पूंजीपतियों को आनाजों की जमाखोरी करने के लिए सरकार खुली छूट दे रही है। इससे भारतीय खाद्य निगम (फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया) को बंद करने की साजिश है। यदि खाद्य निगम बंद हो गया तो देश भर में गांव के सरकारी कोटे की दुकान बंद हो जाएंगी। जिससे गरीब और मजदूर भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी की इस काले कानून में कहीं कोई गारंटी नहीं दी गई है। जिसके विरोध में पूरे देश के अन्नदाता किसानों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में किसानों की तरह मजदूरों को भी बर्बाद करने के लिए मजदूर हित के 29 कानून खत्म किए हैं। जिससे मजदूरों का शोषण करने का अवसर पूंजीपतियों को मिल रहा है। सदर जमीअत उलामा उत्तराखंड प्रदेश के मौलाना मोहम्मद आरिफ ने कहा कि देश के अन्नदाता किसान आंदोलन मेें ठंड के कारण मर रहे। किसानों की चिंता पर बोलते हुए कहा कि सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर देश के अन्नदाता किसानों की समस्या को शीघ्र हल कर देना चाहिए। सरकार के जनविरोधी काले कानून के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रदेश संयोजक भंवर सिंह ने कहा कि किसान नेता चौधरी सर छोटू राम जी किसान- मजदूरों को जागरूक करने के लिए हमेशा एक शेर गुनगुनाया करते थे। कि जब मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है तो क्या वो मेरे हक का फैसला देगा। इसलिए अपने दुश्मन को पहचानों। चमार वाल्मीकि महासंघ के संरक्षक पूर्व सांसद डॉक्टर भगवान दास राठौर एवं अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र तेस्वर ने कहा कि किसान विरोधी एवं जन विरोधी कृषि काले कानून अगर सरकार ने वापस नहीं लिए तो किसान बेचता हुआ मरेगा और बाकी सब खरीदते हुए मरेंगे। कृषि कानून वापिस लेने तक हम किसान आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे। चमार वाल्मीकि महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र श्रमिक एवं जिलाध्यक्ष भानपाल सिंह रवि ने कहा कि एक तरफ तो कुछ चालबाज चालाक लोगों ने हमें समझाया कि रोटी, कपड़ा, मकान हर इंसान की बेसिक जरूरत है दूसरी तरफ शिक्षा, सुरक्षा, संपत्ति अपने अधिकार में रखकर उन्होंने सदियों से किसान- मजदूर को गुलाम बना रखा है। शिक्षा, सुरक्षा, संपत्ति के बगैर कोई भी इंसान रोटी, कपड़ा, मकान पा ही नहीं सकता। बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार मूलनिवासी थे ने कहा कि फ्री में मिलने वाले पानी को कंपनियां 20 रुपए लीटर बेच रही है अगर अनाज भी इनके हाथ में आ गया तो देश का मूलनिवासी दाने-दाने को तरस जाएगा। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक रामसुरेश वर्मा के निर्देशानुसार दिनांक सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय हरिद्वार पर धरना प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। धरना प्रदर्शन आंदोलन के बाद भी अगर किसान विरोधी कानून वापस नहीं लिए तो जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ की प्रदेश अध्यक्ष ललिता रानी, चमार वाल्मीकि महासंघ हरिद्वार के युवा जिला अध्यक्ष विपिन पेवल, कार्यवाहक अध्यक्ष अजय कुमार, शहर युवा अध्यक्ष जितेंद्र तेस्वर, शहर अध्यक्ष सुनीलराजौर, मुकेश श्रमिक, प्रशांत राठोर, गंगा प्रसाद, पूर्व प्रिंसिपल फूल सिंह एवं जगदीश प्रसाद, बबीता सिंह कोरी, काजल, संजीव बाबा, पुष्पेंद्र, पुरुषोत्तम, आशीष, एडवोकेट रूपचंद आजाद, एडवोकेट विनोद आजाद प्रदेश अध्यक्ष भारतीय रमाबाई अंबेडकर महासभा उत्तराखंड, उदयवीर सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष, अतुल देव, सन्नी, रफल पाल, राजू खेरवाल, आशु चंचल ,आशीष राजौर राजेश, सुरेशा, प्रियंका, सुनीता, एडवोकेट शिवम, उमेश बॉस, रविंदर, पुष्पा, जगरोशनदेवी विशालकुमार, मोहित कुमार, सागर कुमार, शगुन कुमार, सुमन लता, तारावती, सरोज, प्रेमों, चंद्रमुखी, शीतल, बसंती, मोतीराम, सिद्धार्थ कटारिया, एवं समाज के तमाम संगठनों के महिला व पुरुषों ने धरने में भाग लिया।

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