हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तराखंड के खेल मंत्री अरविन्द पाण्डेय द्वारा खेल नीति 2020 के निर्धारण के लिए मांगे गये आवश्यक सुझाव के संदर्भ में गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ० शिवकुमार ने सुझाव भेजे है। डाॅ० चौहानने कहाॅ है कि खिलाडी किसी राज्य अथवा जनपद की सीमाओं से बंधा नही होता है। वह पूरे देश का गौरव एवं सम्मान होता है। इसलिए जब खिलाडी अन्तर्राष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सफल होता है, और मेडल लाता है तब उसका सम्मान व्यक्तिगत न होकर पूरे देश और राज्य का सम्मान हो जाता है। इसलिए खिलाडी के सम्मान के साथ उसकी सफलता में सहयोगी शिक्षकों एवं विशेषज्ञों को भी सम्मानित करने के लिए आगामी खेल नीति मे प्रावधान किया जाना जरूरी है। इससे खिलाडियों को तैयार करने वाले शिक्षकों एवं तकनीकि विशेषज्ञ की जिम्मेदारी एवं जवाब देही और अधिक प्रभावी ढंग से तय की जा सकेगी। इसके लिए खेल नीति मे इन बिन्दुओं को भी समाहित करना जरूरी है।
1. खेल नीति-2020 मे खिलाडियों एवं उनकी प्रतिभाओं को मौका एवं अवसर प्रदान करने वाले सभी प्रशिक्षक एवं तकनीक कुशल बनाने वाले शिक्षकों को भी सम्मान देने की व्यवस्था होनी चाहिए।
2. देश में पंजाब तथा हरियाणा मात्र ऐसे राज्य है जहां अन्तर्राष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर मेडलिस्ट खिलाडियों को नकद पारितोषिक के साथ पुलिस मे डीएसपी की सीधी नौकरी राज्य सरकार द्वारा दी जाती है। इसके लिए उत्तराखंड सरकार को भी पहल करते हुए नीति निर्धारण करना चाहिए।
3. खिलाडियों के साथ कोच को प्रशिक्षण के लिए साथ रखने का प्रावधान है, परन्तु खिलाडियों की इन्जरी के लिए फिजियोथैरेपिस्ट तथा चैम्पियनशिप के दोरान खिलाडी में मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों के लिए मनोवैज्ञानिक नियुक्त करने का प्रावधान भी किया जाना जरूरी है। इससे खिलाडियों को खेलों की स्थितियों को बेहतर ढंग से समायोजित करने मे मदद मिलती है। कुछ खेलों मे यह व्यवस्था लागू है, परन्तु इसकी आवश्यकता सभी खेलों मे होना जरूरी है।
4. अभी तक खेलों मे कोच के लिए द्रोणाचार्य एवं खिलाडियों के लिए अर्जुन, राजीव गांधी खेल रत्न आदि पुरूस्कारों की व्यवस्था है। परन्तु एक खिलाडी को कुशल खिलाडी की सीढी तक पहुॅचाने में तकनीकी सहयोग एवं मनोवैज्ञानिकों की भूमिका भी कम नही होती है। इसलिए बेहतर तकनीकी सहयोग एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के लिए इनका सम्मान भी किया जाना नितांत जरूरी है। इसके लिए खेल नीति-2020 मे विशेष प्रावधान किया जाना जरूरी है। डाॅ० शिव कुमार चौहान ने बताया कि खेल मंत्री अरविन्द पाण्डेय की ओर से राज्य मे खेल संस्कृति के विकास, खेलों को प्रोत्साहित करने एवं खिलाडियों के उन्नयन हेतु नई खेल नीति के गठन हेतु विशेषज्ञों से आवश्यक सुझाव दिनांक 25.08.2020 की बैठक मे विचारार्थ आमंत्रित किये गये थे। सुझाव भेजने के लिए अतिम तारीख 24.08.2020 निधारित की गई थी, जिसके लिए डाॅ० शिवकुमार चौहान ने खेलों के विकास से जुडे चार सुझाव सरकार को विचारार्थ भेजे है।



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