हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। जैसा कि आप सभी को मालूम है कि इस समय भारत सहित दुनिया में एक वायरस ने अपनी जड़ें जमा रखी है, जिसके प्रकोप से दुनिया के लगभग 200 से अधिक देशो के लोग पीड़ित चल रहे हैं, भारत में भी इस वायरस के शिकार लोगों का आंकड़ा 5 लाख के करीब पहुंचने वाला है, जिसमें लगभग 15 हजार से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ गयी है, इस वायरस की पहचान नोवल कोरोनावायरस COVID-19 के रूप में हुई है, जनपद हरिद्वार के जिलाधिकारी द्वारा जनपद में COVID-19 के घर घर सर्वे के लिए सर्वे टीमों का गठन किया गया है, जिसमें उक्त सर्वे का कार्य आंगनवाडी कार्यकत्रियों को सौपा गया है, आंगनवाडी कार्यकत्रियों को घर घर सर्वे में परेशानियों और विरोध का सामना आम समाज का करना पड़ रहा है, इसके दो मुख्य कारण है, पहला कारण यह है, कि सर्वे के लिए कुछ अप्रशिक्षित कर्मचारियों को लगाया गया है, जो सर्वे के क्षेत्र को भली प्रकार से नहीं जानती है, दूसरा कारण यह है, कि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर सर्वे टीम को बिना विभागीय पहचान पत्र के दाखिल नहीं होने दिया जा रहा है, जिन कारण सर्वे करने वाले कुछ कर्मचारी अपना कार्य भी शुरू नहीं कर पाये हैं, सर्वे टीम के कर्मचारियों को जो सुपर वाइजर है, वो मजे से अपने घरों में बैठकर कर्मचारियों को फोन पर ही दिशा-निर्देश दे रहे हैं, और सर्वे टीम के कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण करने के बजाए फोन पर उल्टी सीधा कर्मचारियों को सुना रहे हैं, सुपर वाइजर स्वयं तो घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं, और सर्वे टीम को COVID-19 के सर्वे में धकेल दिया है, क्या सर्वे टीम के कर्मचारियों COVID-19 वायरस के शिकार नहीं हो सकते हैं, केवल सुपर वाइजर ही शिकार हो सकते हैं, सर्वे टीम के सुपर वाइजरो को सर्वे टीम का साथ देने के लिए मैदान में उतरना चाहिए क्योंकि सर्वे टीम के कर्मचारी भी इंसान हैं, उनके भी मां बाप तथा बच्चे हैं, तथा सर्वे टीम को सर्वे में परेशानी ना हो उसके लिए विभागीय पहचान पत्र उपलब्ध कराना चाहिए तथा सर्वे कर्मचारियों के सामने पेश आ रही समस्याओं का समाधान विभाग और सुपर वाइजरो को करना चाहिए नाकि फोन पर ही बिना समस्या जाने दिशा निर्देश देने चाहिए।



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