हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अमित रतूडी) ऋषिकेश। क्षेत्र में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत कोलघाटी से लेकर सीमाडेंटल तक सीवर लाइन बिछाने का काम किया गया। कंप्लेक्शन के बाद आईआईटी रुड़की से टेस्ट कराने के बाद क्लीनचिट के आधार पर लोक निर्माण विभाग ने सड़क बनाने का कार्य शुरू किया। फिर भी सड़क की मिट्टी इन दिनों कुछ जगहों पर धंसने लगी है। जो हादसों को आमंत्रण दे रही है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा सीवर लाइन बिछा रही है। जिसके लिए एम्स को नेशनल हाईवे से जोड़ने वाली बैराज रोड को भी करीब 5 किलोमीटर तक खोदा गया। लाइन बिछाने का काम पूरा करने के बाद विभाग ने सड़क की टेस्टिंग आईआईटी रुड़की से कराई। आईआईटी के विशेषज्ञों ने सड़क की गुणवत्ता की जांच करने के बाद विभाग को सड़क डामर बिछाने लायक बताते हुए सर्टिफिकेट दे दिया। जिसके बाद विभाग ने सड़क को पीडब्ल्यूडी के हैंडओवर कर दिया। आईआईटी के प्रमाण-पत्र के आधार पर पीडब्ल्यूडी ने करीब ढाई किलोमीटर सड़क पर निर्माण कार्य शुरू किया, तो कई जगह से सड़क की मिट्टी धंस गई। ऐसे में सड़क का काम अधर में फंस गया है। सड़क की मिट्टी धंसने से आईआईटी की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारियों की लापरवाही से अधर में पड़ी व्यस्ततम बैराज रोड से गुजरने वाले स्थानीय लोगों और इलाज के लिए एम्स आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि वाहनों के दुर्घटना होने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। आलम यह है कि विभागीय अधिकारी मामले में कुछ कहने को तैयार नही हैं।
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