हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। हरिद्वार की उपनगरी ज्वालापुर की ईदगाह के शहर इमाम और दारूल उलूम असअदिया ईक्कड खुर्द हरिद्वार के वाइस-चांसलर तथा दारूल उलूम इमदादिया इब्राहीमपुर हरिद्वार के प्रबंधक हज़रत मौलाना अब्दुल वाहिद ने हरिद्वार की गूंज समाचार पत्र के वरिष्ठ सम्पादक से लोकडाउन और रमजान माह को लेकर कुछ खास बातो की और साथ ही साथ मुस्लिम समाज के लोगों से भी अपील की शहर इमाम ने बताया कि जैसा की सभी को मालूम है, इस वक्त मुल्क एक बहुत बडी परेशानी से दो चार हो रहा है, यानी एक ऐसी बीमारी फैली हुई है, जिसको नोवल कोरोनावायरस COVID-19 के रूप में जाना जा रहा है, इस बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर तरीका मरकजी और सूबाई हुकूमत तथा स्वास्थ्य विभाग ने अहतियाती कदम बताये है, इसी अहतियाती कदम के तहत लोकडाउन की व्यवस्था को लागू किया गया है, और लोकडाउन की व्यवस्था वर्तमान में भी लागू हैं, इसी लाकडाउन की अवधि में इस्लाम मजहब का सबसे अफजल महीना रमजान भी अंकरीब है, रमजान का महीना मुस्लमानो के लिए बड़ी ही कृपा और दयालुता का महीना है, इसी महीने में खुदा ने कुरान को उतारा, नबी सल०ने फ़रमाया की रमजान अल्लाह का महीना है, यानी इस महीने की इबादत(पूजा अर्चना) का बदला खुदा खुद देगा, इस महीने में मुस्लमान रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज के अलावा तरावीह आदि की नमाज़े पढ़ते हैं, क़ुरान ज्यादा से ज्यादा पढ़ते हैं, और भी जो इबादतें होती है, वो सहूलियत के हिसाब से करते हैं, शहर इमाम ने कहा कि इस बार रमजान का महीना लोकडाउन के दरमियान आ रहा है, तो सभी मुस्लमान पांचों वक्तो की नमाज के अलावा तरावीह आदि की नमाजे अपने अपने घरों में पढ़ें, घरों में रहकर ही ज्यादा से ज्यादा इबादत करे, लोकडाउन का पालन पूरी तरह करें, रमजान में महीने में खुदा इबादतो के सवाब को 70 गुणा बढ़ा देता है, लोकडाउन में घरों में रहकर अपने आपको इबादतों में मशगूल (व्यस्त) रखें, दुआओं का अहतमाम रखें, क्योंकि दुआ इबादत का मग्ज यानी (मस्तिष्क) है, रोजा केवल ना खाने पीने का ही नहीं होता रोजा तो आंख कान हाथ पैर, मुंह का भी होता है, यानी रोजे के दरमियान बुरा ना सोचे, अपनी आंखों से बुरा ना देखे, बुराई ना करें, कानो से बुराई ना सुने, हाथों और पैरों से बुराई की तरफ जाने से बचो इन सभी बातों पर अमल करके, रोजे का सही हक अदा हो सकता है, परेशानी का समय है इंशाअल्लाह निकल जायेगा, रमजान के महीने में अपने आस पड़ोस रिश्तेदार दोस्त, बेसहारा, गरीब, अनाथ, विधवा, बूढ़ों की इफ्तारी और सहरी का ख्याल रखें, क्योंकि नबी सल०ने फ़रमाया है, वो आदमी मोमिन नहीं हो सकता है जिसका पड़ोसी भूखा सोता हो, तो सभी मुस्लमान भाई इन सभी बातों का ध्यान रखें, रमजान का अहतमाम करें और लाकडाउन का पालन एक अच्छे शहरी की तरह करे।
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