हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। एक प्रासंगिकता तो यह कि जब तक इंसान क़ुरआन मजीद की तिलावत करता है, अल्लाह तआला की ख़ास रहमत उस पर उतरती है, जबकि रोज़ादार जब तक इफ़्तार नहीं कर लेता उस वक़्त तक उस पर अल्लाह की रहमत बरसती रहती है, दूसरी प्रासंगिकता यह कि क़ुरआन की तरह रोज़ा भी रोज़ादार के हक़ में शफ़ाअत करेगा इसलिए हदीसे पाक में कहा गया है, कि क़्यामत के रोज़ क़ुरआन मजीद भी अपने पढ़ने वाले की शफ़ाअत करेगा और रोज़ा भी रोज़ा रखने वाले की शफ़ाअत करेगा, तीसरी प्रासंगिकता यह है, कि तिलावत से तशब्बोह बिल्हक़ नसीब होता है, यानी ज़ाते बारी तआला से एक क़िस्म की प्रासंगिकता होती है, क्योंकि क़ुरआन अल्लाह तआला की सिर्फ़ किताब ही नहीं बल्कि अल्लाह तआला का कलाम भी  है, यह अल्लाह तआला की एक बोली है, इस बिना हदीसे पाक में है, कि क़ुरआन से बरकत हासिल करो यह अल्लाह का कलाम है, और उसकी ज़ात से निकला है, तो क़ुरआन के कलामे बारी होने की वजह से तिलावत करने वाले को अल्लाह तआला के साथ एक मुशाबहत हो जाती है, अल्लाह तआला ने भी इस कलाम को पढ़ा आज बन्दे भी इस कलाम को पढ़ रहे हैं, कितनी बड़ी प्रासंगिकता है, और रोज़ा में शाने समदियत की बिना पर भी तशब्बोह बिल्हक़ है, कि अल्लाह तआला खाने पीने से बाला तर मुनज़्ज़ह और मुबर्रा है, और बंदा भी रोज़ा की हालत में  खाने पीने को छोड़ कर अल्लाह की एक सिफ़त को कुछ देर के लिए इख़्तियार करता है, तो रोज़ा से भी तशब्बोह बिल्हक़ हासिल हुआ और तिलावते क़ुरआन से भी, चौथी प्रासंगिकता यह है, कि कलमे रब्बानी के ज़रिए क़ुरआन पढ़ने वाले को अल्लाह तआला के साथ एक ख़ास क़ुर्ब(यानी नज़्दीकी हासिल होती है)होता है, और रोज़ा के ज़रिये भी बन्दे को क़ुर्ब हासिल होता है, जैसा कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि रोज़ा मेरे लिये है, और रोज़े का बदला भी मैं ही दूंगा तो रोज़े से भी रब मिलता है, और कलमे रब्बानी से भी रब मिलता है, तो मालूम हुआ कि क़ुरआन और रोज़े के अंदर बहुत सारी प्रासंगिकता हैं, यानि जब तक बंदा क़ुरआन करीम की तिलावत करता रहता है, तो उस पर अल्लाह की खास रहमत नाज़िल होती रहती है, इसी तरह जब तक बंदा रोज़ा इफ़्तार नहीं कर लेता उस पर अल्लाह की ख़ास रहमत नाज़िल होती रहती है, यही है मुनासबत यानी प्रासंगिकता कहते हैं, यह सभी बातें की जानकारी हरिद्वार की गूंज समाचार पत्र को इस्लाम मजहब के जानकार मुहम्मद सलीम क़ासमी सहायक अध्यापक मदरसा दारुल उलूम असअदिआ इक्कड़ ख़ुर्द हरिद्वार ने दी।
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